इन दिनों मंकीपॉक्स ने दुनिया के कुछ इलाकों में डर फैला दिया है। वहीं इस बीमारी की गंभीरता को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे इमरजेंसी घोषित कर दिया है। खासतौर पर मानसून में इन बीमारियों का प्रकोप ज्यादा देखने को मिलता है। यह दोनों ही वायरल संक्रमण हैं जो बच्चों को भी गंभीर रुप से प्रभावित कर सकता है। मंकीपॉक्स एक दुलर्भ संक्रमण है। यह संक्रमण जानवरों से इंसान में और एक इंसान से दूसरे में फैलता है। छोटे बच्चों की इम्यूनिटी कमजोर होती है ऐसे में वे जल्दी इसकी चपेट में आ जाते हैं। वहीं मीजल्स भी बच्चों में होने वाली एक कॉमन बीमारी है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या फिर छींकने से मीजल्स एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। मीजल्स के कारण बच्चों में निमोनिया, कान में इंफेक्शन, गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन और मृत्यु भी हो सकती है। तो चलिए आपको बताते हैं मंकीपॉक्स और मीजल्स के लक्षणों में अंतर के बारे में।
मंंकीपॉक्स और खसरा के लक्षण
मंकीपॉक्स और खसरा (मीजल्स) दोनों ही वायरल बीमारियां हैं, जो बच्चों और बड़ों को प्रभावित कर सकती हैं। इनके कुछ लक्षण कॉमन होते हैं और कुछ में अंतर हो सकता है।
मंकीपॉक्स के लक्षण
बुखार
सिरदर्द

थकान
मांसपेशियों में दर्द
पीठ में दर्द
सूजी हुई लिम्फ नोड्स (गर्दन, बगल और जांघ में)
दानें हो जाना जो बुखार के 1-3 दिन बाद दाने उभरते हैं।
दाने आमतौर पर चेहरे से शुरू होते हैं और शरीर के अन्य हिस्सों में फैलते हैं।
ये दाने छोटे और उभरे हुए होते हैं, जो बाद में फफोलों (ब्लिस्टर्स) में बदल जाते हैं।
फफोलों के बाद पपड़ी बनती है और अंत में वे सूख जाते हैं।
फफोले हथेलियों और तलवों में भी हो सकते हैं।
खसरा या मीजल्स के लक्षण
बुखार
गले में खराश
खांसी
नाक बहना

कंजंक्टिवाइटिस
आंखों से पानी आना
दानें निकलना
बुखार के 3-5 दिन बाद लाल, चपटे दाने उभरते हैं।
दाने आमतौर पर चेहरे और गर्दन से शुरू होते हैं और फिर नीचे की ओर पूरे शरीर में फैल जाते हैं।
दाने एक-दूसरे से मिलकर बड़े धब्बे बना सकते हैं।
खसरे के दाने उभार वाले नहीं होते और इनमें खुजली होती है।
दोनों के लक्षणों में फर्क
मंकीपॉक्स होने पर लिम्फ नोड्स में सूजन आ जाती है जबकि मीजल्स में ऐसा नहीं होता।
मंकीपॉक्स में दाने फफोलों के रूप में उभरे हुए दिखते हैं, जबकि खसरे में दाने लाल और चपटे नजर आती है।
मंकीपॉक्स के दाने धीरे-धीरे विकसित होते हैं और उन्हें पूरी तरह से ठीक होने में समय लगता है, जबकि मीजल्स होने पर दाने तेजी से उभरते हैं और 7-10 दिनों में ठीक हो जाते हैं।
दोनों बीमारियों में बुखार होता है, लेकिन मंकीपॉक्स में यह ज्यादा समय तक बना रहता है और दानों के साथ बना रहता है, जबकि मीजल्स में बुखार आमतौर पर दाने उभरने के बाद धीरे-धीरे कम होने लगता है।
बच्चों को मंकीपॉक्स और मीजल्स से बचाने के टिप्स
मीजल्स से बचाव के लिए एमएमआर MMR (Measles, Mumps, Rubella) वैक्सीन दी जाती है। यह वैक्सीन बच्चों को 9-12 महीने की उम्र में दी जाती है और दूसरी खुराक 15-18 महीने में दी जाती है। इसे समय पर जरूर लगवाएं।
बच्चों को नियमित तौर पर हाथ धोने की आदत डालें, खासकर खाने से पहले और खाने के बाद।

यदि परिवार में किसी व्यक्ति में मंकीपॉक्स या मीजल्स के लक्षण हैं, तो बच्चों को उनसे दूर ही रखें।
बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार दें ताकि उनका इम्यून सिस्टम मजबूत हो।
बच्चों की डाइट में फल, सब्जियां और उचित मात्रा में प्रोटीन को शामिल करें।
डाइट में विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थ जैसे कि संतरा, नींबू, कीवी आदि शामिल करें।
घर के अंदर की सफाई का ध्यान रखें, खासकर उन जगहों पर जिन्हें बच्चे अक्सर छूते हैं।
बच्चों के खिलौने, कपड़े और अन्य सामान को नियमित तौर पर साफ करें।
बच्चों में बुखार, खांसी या त्वचा पर किसी भी असामान्य दाने दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

