बारिश के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि इस दौरान हवा में नमी और गड्ढों में जमा पानी मच्छरों की संख्या बढ़ाता है। डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो ऐडीस मच्छरों के काटने से फैलता है। यह वायरस शरीर में प्रवेश कर सबसे पहले प्लेटलेट्स पर हमला करता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है और तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, उल्टी जैसी समस्याएं होती हैं। डेंगू के गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
क्या है इसके लक्षण
डेंगू के लक्षणों में ठंड के साथ बुखार, अधिक पसीना, जोड़ों में दर्द, भूख कम लगना, शरीर पर लाल चकत्ते, मसल्स और हड्डियों में दर्द, थकान और कमजोरी शामिल हैं। यदि समय पर इलाज नहीं मिलता, तो नाक, मुंह और मसूड़ों से खून आना जैसे खतरनाक लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
बच्चों में डेंगू का खतरा अधिक
डेंगू का खतरा विशेष रूप से बच्चों में अधिक होता है। 5 से 10 साल के बच्चों को डेंगू का जोखिम सबसे ज्यादा रहता है। एक रिपोर्ट के अनुसार डेंगू से पीड़ित 80% से अधिक बच्चे 9 साल से कम उम्र के होते हैं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में डेंगू से होने वाली मौत की संभावना अधिक होती है।
इन लोगों को दोबारा डेंगू होने का खतरा
इसके अलावा, डेंगू एक बार होने के बाद दोबारा भी हो सकता है। दोबारा डेंगू का खतरा उन लोगों में अधिक होता है, जो जंगल या पेड़-पौधों वाले इलाकों में रहते हैं। दूसरी बार होने वाला डेंगू अधिक गंभीर हो सकता है, इसलिए इम्यून सिस्टम को मजबूत रखना और मच्छरों से बचाव करना बेहद जरूरी है। समय पर इलाज और सावधानी बरतकर इस खतरनाक बीमारी से बचा जा सकता है।
