अगर आपके घर में भी छोटा बच्चा है, और मुंह में कुछ भी उठा कर डाल लेता है तो हो जाएं सावधान। यही नहीं अगर आप अपने हाथों से भी बच्चे को कुछ खिला रहे हैं तो भी सावधानी बरते। आपकी जरा-सी लापरवाही बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। दरअसल हाल ही छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा में एक ढाई साल का बच्चा संकट में पड़ गया, जब उसकी दादी उसे अंकुरित चने खिला रही थी। अचानक बच्चे की किलकारियां बंद हो गईं, और वह छटपटाने लगा। उसके गले से सीटी जैसी आवाजें आने लगीं, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। माता-पिता ने तत्काल बच्चे को हाईटेक हॉस्पिटल में ले जाया।
चना फंसा श्वास नली में
हाइटेक हॉस्पिटल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अपूर्व वर्मा ने बताया कि चना बच्चे की श्वास नली में फंस गया था, जिससे वह सांस नहीं ले पा रहा था। श्वास की कोशिशों में सीटी जैसी आवाजें आ रही थीं और बच्चे का ऑक्सीजन सैचुरेशन तेजी से गिर रहा था। स्थिति को गंभीर मानते हुए शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मिथिलेश देवांगन निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. नरेश देशमुख और इंटेंसिविस्ट डॉ. श्रीनाथ की एक टीम गठित की गई और बच्चे का इलाज किया गया।
उपचार की प्रक्रिया
वहीं एक्स-रे से चना फंसे होने का पता चलने के बाद, ट्रेकियोस्टोमी द्वारा बच्चे की सांस को सुचारू किया गया। इसके बाद ब्रोंकोस्कोप को मुंह के रास्ते से श्वास नली में सरकाया गया ताकि अवरोधक वस्तु को निकाला जा सके। चना श्वास नली को लगभग पूरी तरह से ढंक चुका था, जिससे बच्चे की सांस में रुकावट आ रही थी।
हालात में सुधार
डॉ. वर्मा ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय ऐसा आया जब बच्चे का ऑक्सीजन सैचुरेशन 20-25 के करीब आ गया था, लेकिन जैसे ही चना हटा, बच्चे की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। फिलहाल बच्चा खतरे से बाहर है और ट्यूब हटा दी गई है।
सावधानी की सलाह
डॉ. वर्मा ने चेतावनी दी कि जब बच्चा खेल रहा हो या किलकारियां मार रहा हो, तब उसे खाने का सामान न दें। ऐसे समय में बच्चे का ध्यान भोजन पर नहीं होता और यह श्वास नली में जा सकता है, जिससे गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
