प्रीमेच्योर शिशुओं की हड्डियां जन्म के समय से ही कमजोर होती हैं। इसका कारण है कि प्रेग्नेंसी के दौरान अंतिम हफ्तों में भ्रूण की हड्डियों का विकास तेज हो जाता है और इस दौरान यदि समय से पहले ही डिलीवरी हो जाए तो शिशु की हड्डियों का विकास पूरा नहीं हो पाता और हड्डियां जन्म के समय से ही कमजोर रहती हैं। प्रीमेच्योर शिशुओं में जन्म से पहले पैदा होने का कारण है कि प्रेग्नेंसी के अंतिम हफ्तों में भ्रूण की हड्डियों का विकास तेज हो जाता है और इस दौरान यदि समय से पहले डिलीवरी हो जाए तो शिशु की हड्डियों का विकास पूरी तरह से नहीं हो पाता और हड्डियां जन्म के समय कमजोर ही रहती हैं। प्रीमैच्योर शिशुओं में जन्म से पहले पैदा होने के कारण कैल्शियम, फॉस्फोरस, विटामिन-डी जैसे पोषक तत्वों का स्तर कम हो जाता है इसी वजह से हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। हड्डियों में विटामिन की कमी से प्रीमेच्योर शिशुओं में हड्डियों की कमजोरी की बीमारी ओस्टियोपोनिया हो सकती है। इस स्थिति के कारण शिशुओं की हड्डियां आसानी से टूट जाती हैं या फिर उन्हें हड्डियों से संबंधित कोई समस्या हो सकती है।
तो चलिए इस आर्टिकल के जरिए आपको प्रीमेच्योर बेबी की बोन हेल्थ का ख्याल रखने के तरीके बताते हैं। आइए जानते हैं।
प्रीमेच्योर बेबी की हड्डियों के लिए स्तनपान के फायदे
प्रीमेच्योर शिशुओं की हड्डियों के विकास और मजबूती के लिए स्तनपान बहुत ही फायदेमंद होता है। मां के दूध में कई जरुरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जो प्रीमेच्योर शिशुओं की हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। मा के दूध में कैल्शियम और फॉस्फोरस मौजूद होता है जो हड्डियों के विकास के लिए जरुरी है।

. मां के दूध में विटामिन-डी भी पाया जाता है जो हड्डियों को मजबूती देने के लिए जरुरी है।
. स्तनपान के जरिए प्रीमेच्योर बेबी में ऑस्टियोपोनिया का खतरा कम करने में मदद करता है।
. मां का दूध, शिशुओं की हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाने में मदद करता है।
. स्तनपान करवाने से शिशुओं में किसी भी तरह की इंफेक्शन का खतरा कम होता है। इसके कारण उसकी हड्डियों का विकास बिना किसी रुकावट के हो सकता है।
ऐसे बनाएं शिशु की हड्डियां मजबूत
. जन्म के बाद नियमित तौर से शिशु की हड्डियों की जांच की जाती है। यदि हड्डियों में कमजोरी पाई जाती है तो इसके लिए उनका इलाज भी किया जाता है।
. शिशुओं की हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए उनकी मालिश करें। हल्की मालिश से हड्डियों में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ेगा और उन्हें मजबूती मिलेगी।
. नवजात शिशुओं के लिए कुछ समय के लिए धूप में रहना विटामिन-डी के प्राकृतिक स्त्रोत के तौर पर फायदेमंद होता है। हालांकि नवजात शिशुओं को धूप में लाने से पहले हमेशा एक बार डॉक्टर की सलाह जरुर ले लें।

. प्रीमेच्योर शिशुओं के लिए मुख्यतौर पर तैयार किए गए फॉर्मूला मिल्क को देने से भी उनकी हड्डियों का विकास होता है।
. प्रीमेच्योर शिशुओं में हड्डियों की कमजोरी (ओस्टियोपोनिया) का पता लगाने के लिए हड्डियों की स्कैनिंग की जा सकती है।
. फिजिकल थेरेपी की मदद से शिशुओं की मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने में भी मदद मिलती है। डॉक्टरों की निगरानी में शिशु की थेरेपी दी जाती है।
. डॉक्टर की सलाह पर शिशुओं को सप्लीमेंट्स भी दिए जाते हैं।
. यदि शिशु स्तनपान कर रहा है तो मां के आहार में कैल्शियम और विटामिन-डी की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए क्योंकि यही पोषक तत्व दूध के जरिए शिशु तक पहुंचते हैं।
