क्या कभी आपको ऐसा फील हुआ है कि आपके फेस पर स्वेलिंग हो रही है। लेकिन आपने कभी ध्यान ही नहीं दिया है। ऐसे में ये आपकी बॉडी के अन्य पार्ट्स को भी ख़राब करने लगता है। वहीँ ये भी बता दें कि अगर चेहरा फूला हुआ है तो इसे मेडिकल साइंस की भाषा में कोर्टिसोल फेस कहा जाता है। दरअसल जब आप बहुत ही ज्यादा तनाव या स्ट्रेस में होते हैं तो तनाव के कारण फैट जमा होने लगता है। इसे कुशिंग सिंड्रोम भी बोला जाता है। अकसर जब स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल ज्यादा प्रोडक्शन करने ललगता है। तो ब्लड में इसका स्तर बढ़ जाता है। वहीँ कोर्टिसोल हार्मोन के बढ़ने की वजह से ही फेस पर सुजन नहीं आती बल्कि इसके कई अन्य कर्ण भी हो सकते हैं। तो आज इसी के बारे में जानते हैं।

आखिर क्या है कोर्टिसोल

दरअसल कोर्टिसोल हमारे शरीर में एक एडरनल ग्लांड से पैदा होने वाला हार्मोन होता है, जो हर इंसान की एक किडनी के टॉप पर होता है और आसान शब्दों में कहें तो हर एक ऑर्गन को बताता है कि उन्हें कैसे काम करना है, क्योंकि यह ब्लडस्ट्रीम के जरिए शरीर के सभी अंगों तक पहुंचता है। वहीँ अगर कोर्टिसोल का सही बैलेंस न हो तो ये सेहत को ख़राब करता है। साथ ही इसका बहुत ज्यादा प्रोडक्शन सेहत से जुड़ी परेशानियों का कारण भी बनता है।

मानव शरीर में इसके क्या रोल है

कोर्टिसोल आपके शरीर को मुश्किल स्थितियों से निपटने का काम करता है। आपका शरीर एड्रेनलाइन जैसे दूसरे ‘फाइट या फ्लाइट’ हार्मोन को एक्टिव करने के बाद कोर्टिसोल को रिलीज कने में सक्षम होता है। इसके अलावा, कोर्टिसोल फास्ट एनर्जी के लिए लिवर से ग्लूकोज रिलीज को ट्रिगर करता है। यह कार्बोहाइड्रेट और फैट मेटाबॉलिज्म के लिए भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कोर्टिसोल से परेशानी होने का कारण क्या है  

आपको बता दें कोर्टिसोल एक सेफ्टी मैकेनिज्म होता है। लेकिन अगर आपके शरीर में कोर्टिसोल का लेवल लगातार बढ़ रहा है। तो ये शरीर के लिए रिस्क हो सकता है। जिस वजह से सूजन बढ़ने की सम्भावना भी बढ़ जाती है। इसके अलावा लगातार हाई कोर्टिसोल रहने से ब्लड शुगर भी बढ़ सकता है, जिससे टाइप 2 डायबिटीज होने का चांस रहता है।

शाम में होता है कम कोर्टिसोल लेवल

वहीँ शाम के समय कोर्टिसोल स्तर कम होने लगता है, वहीँ सुबह उठने से ठीक पहले इसका स्तर पीक पर होता है। इसलिए लगातार हाई लेवल कोर्टिसोल होने से आपकी स्लीपिंग सायकल डिस्टर्ब होती है।वहीँ ये फैट और शुगर जैसे फूड प्रोडक्ट्स के लिए क्रेविंग भी बढ़ाता है। जो पेट के आसपास वजन बढ़ाने का कारण बनता है।

न्यूरोट्रांसमीटर बैलेंस बिगड़ता है

वहीँ जब कोर्टिसोल का लेवल हाई होता है, तो यह ब्रेन में न्यूरोट्रांसमीटर के बैलेंस को बिगाड़ने लगता है। जिससे चिंता और चिड़चिड़ापन भी बढ़ जाता है। इससे आप बहुत से चीजों पर ध्यान सही से केंद्रित भी नहीं कर पाते हैं।

बैलेंस्ड डाइट लें

वहीँ ये भी बता दें कि कोर्टिसोल के स्तर को कम करने के लिए आपको अपनी बैलेंस्ड डाइट करने की जरूरत है। इसके लिए चीनी और कैफीन से दूरी बना लें। वहीँ आप मछली और सी फूड का सेवन कर सकते हैं। इसके अलावा प्लांट-बेस्ड  चीजों पर भी ध्यान दें। सादा दही और एप्पल साइडर सिरका जैसे फर्मेंट्ड प्रोडक्ट्स को शामिल करने से कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है।

नींद को अच्छे से लें

लंबे समय तक नींद की कमी की वजह से ब्लडस्ट्रीम में कोर्टिसोल के लेवल को बहुत प्रभावित करती है। ऐसे में इससे बचने के लिए नींद के पैटर्न को ठीक करने की जरूरत है। साथ ही स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज पर भी ध्यान दें। वॉकिंग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसे कम प्रभाव वाली एक्सरसाइज, हाई कोर्टिसोल लेवल वाले लोगों के लिए मददगार हो सकते हैं।

By tnm

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