इन दिनों सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले का एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें घायल महिला सब-इंस्पेक्टर प्रीति राय को थानाध्यक्ष रंजना गुप्ता गोद में उठाकर अस्पताल के अंदर ले जाती हुई नजर आ रही हैं। इस वीडियो ने लोगों का ध्यान खींचा और उनकी बहादुरी की सराहना हो रही है।
सोशल मीडिया वायरल हुई वीडियो
इस वीडियो में दिखाया गया है कि थानाध्यक्ष रंजना गुप्ता घायल महिला सब-इंस्पेक्टर प्रीति राय को गोद में उठाकर तेजी से अस्पताल के अंदर ले जा रही हैं। इसे देखकर लोगों ने रंजना गुप्ता की प्रशंसा की और उनके इस साहसिक कदम को सोशल मीडिया पर काफी सराहा गया। वीडियो के वायरल होने के बाद कई लोग इस घटना की तारीफ कर रहे हैं और इसे पुलिस सेवा की वास्तविकता का एक उदाहरण मान रहे हैं।
अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने पर गोद में उठाना पड़ा
हालांकि इस घटना को लेकर एक दावा भी किया जा रहा है कि अस्पताल में स्ट्रेचर न मिलने के कारण रंजना गुप्ता को यह कदम उठाना पड़ा। सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ वीडियो शेयर किया जा रहा है कि अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं न होने के कारण थानाध्यक्ष को मजबूरी में ऐसा करना पड़ा। इस दावे के बाद लोगों ने अस्पताल प्रशासन की आलोचना भी की है।
पुलिस ने इस मामले में दी सफाई
वहीं पुलिस की ओर से इस मामले में सफाई दी गई है। पुलिस का कहना है कि स्ट्रेचर की उपलब्धता की जानकारी नहीं थी, लेकिन प्राथमिकता घायल सब-इंस्पेक्टर का तत्काल इलाज करवाना था। इसलिए थानाध्यक्ष रंजना गुप्ता ने समय बर्बाद न करते हुए प्रीति राय को गोद में उठाकर अस्पताल के अंदर पहुंचाया ताकि उनका इलाज समय पर शुरू हो सके। पुलिस के इस बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया कि थानाध्यक्ष रंजना गुप्ता ने शीघ्र निर्णय लेते हुए घायल महिला अधिकारी की मदद की।
पुलिस पर लोगों का बढ़ा विश्वास
इस घटना ने न सिर्फ रंजना गुप्ता की बहादुरी को सामने लाया बल्कि पुलिस सेवा के प्रति उनके समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को भी उजागर किया है। इस प्रकार की घटनाएं समाज में पुलिस के प्रति विश्वास को मजबूत करती हैं और यह दिखाती हैं कि पुलिस अधिकारी किसी भी परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए तैयार रहते हैं।
वहीं समाज में पुलिस की छवि को सुधारने के लिए ऐसी घटनाएं महत्वपूर्ण हैं। रंजना गुप्ता की यह पहल अन्य पुलिस अधिकारियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी और यह दिखाएगी कि किस प्रकार एक पुलिस अधिकारी को अपनी ड्यूटी निभानी चाहिए, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों। इस घटना ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि पुलिस सेवा में मानवता और सेवा की भावना कितनी महत्वपूर्ण होती है।
