देश में आए दिन महिलाओं के साथ होने वाले दुष्कर्मों के मामले सामने आते हैं, जो दिल दहला देने वाले होते हैं। ऐसे में कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में केंद्र सरकार से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 184 में संशोधन करने की अपील की है। यह संशोधन विशेष रूप से वयस्क दुष्कर्म पीड़ितों की जांच से संबंधित है। हाईकोर्ट ने सुझाव दिया है कि दुष्कर्म पीड़ितों की चिकित्सा जांच केवल महिला डॉक्टर द्वारा की जानी चाहिए, ताकि पीड़ितों की निजता का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके। यह निर्णय हाल ही में भारत में लागू हुए तीन नए आपराधिक कानूनों के संदर्भ में आया है, जो ब्रिटिश शासन काल से चले आ रहे तीन पुराने कानूनों को प्रतिस्थापित करते हैं।
नए कानून 1 जुलाई से होंगे प्रभावी
पुराने कानूनों में भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.PC), और साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) शामिल थे। इन्हें अब भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), और भारतीय साक्ष्य अधिनियम द्वारा बदल दिया गया है। यह परिवर्तन 25 दिसंबर, 2023 को राष्ट्रपति द्वारा मंजूरी मिलने के बाद हुआ। सरकार ने घोषणा की थी कि ये नए कानून 1 जुलाई से प्रभावी होंगे।
दुष्कर्म पीड़ितों की मेडिकल जांच को लेकर संवेदनशीलता बरतने की अपील
हाईकोर्ट के जस्टिस एमजी उमा की एकल पीठ ने दुष्कर्म पीड़ितों की मेडिकल जांच को लेकर संवेदनशीलता बरतने पर जोर दिया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि जब तक बीएनएसएस की धारा 184 में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक दुष्कर्म पीड़ितों की जांच केवल महिला पंजीकृत चिकित्सक या उनकी देखरेख में की जाए। साथ ही अदालत ने सभी प्राधिकारियों को जिसमें पुलिस अधिकारी, अभियोजक, डॉक्टर, चिकित्साकर्मी और न्यायिक अधिकारी शामिल हैं, दुष्कर्म पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार के महत्व पर शिक्षित करने का निर्देश दिया।
आरोपी की जमानत याचिका खारिज
आपको बता दें कि यह निर्णय उस समय लिया गया जब अदालत ने अजय कुमार भेरा की जमानत याचिका खारिज की। भेरा पर दुष्कर्म और हत्या के प्रयास का आरोप है। अदालत ने इस मामले में स्पष्ट किया कि नए कानूनों का उद्देश्य केवल दोषियों को दंडित करना नहीं है, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना और उनके अधिकारों की रक्षा करना भी है।
नए कानूनों का उद्देश्य देश
सरकार का पक्ष यह है कि पुराने कानून अंग्रेजी शासन को मजबूत करने और उसकी रक्षा करने के लिए बनाए गए थे, जबकि नए कानूनों का उद्देश्य देश के नागरिकों को संविधान से मिले अधिकारों की रक्षा और उन्हें इंसाफ दिलाना है। इस दिशा में उठाया गया यह कदम भारतीय न्याय व्यवस्था में सुधार की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
