बेंगलूरु: रायचूर में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की मांग को लेकर आंदोलन 803वें दिन भी जारी रहा। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को जब केंद्रीय बजट पेश किया, तो आंदोलनकारियों ने बजट में रायचूर में एम्स की स्थापना का कोई जिक्र नहीं होने पर गहरी नाराजगी जताई है। आंदोलनकारी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने एम्स मिलने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया।
एम्स की मांग और राजनीतिक प्रयास
रायचूर में एम्स की स्थापना के लिए समिति के संयोजक बसवराज के. ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने इस साल जनवरी में केंद्र सरकार को पत्र लिखकर रायचूर में एम्स की मांग की थी। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, गृह मंत्री जी. परमेश्वर और समाज कल्याण मंत्री एच.सी. महादेवप्पा ने 29 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्रीय बजट 2024-25 में रायचूर के लिए एम्स की घोषणा करने की मांग की थी।
राजनीतिक दबाव और आंदोलन की योजना
बसवराज के. ने कहा कि कल्याण कर्नाटक के लोग और क्षेत्र के सभी राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि रायचूर में एम्स की स्थापना की मांग पर एकमत हैं। बावजूद इसके लंबे समय तक चले संघर्ष और बेंगलूरु से राजनीतिक दबाव के बावजूद केंद्र सरकार ने रायचूर को एम्स देने से इनकार कर दिया है।
उन्होंने कहा कि रायचूर के लिए एम्स की मांग पर केंद्र सरकार की उदासीनता से क्षेत्र के लोग और राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि काफी नाराज हैं। उन्होंने घोषणा की कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और नागरिक समाज संगठन छह अगस्त को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेंगे।
आंदोलन की अहमियत
रायचूर में एम्स की मांग को लेकर चल रहा यह आंदोलन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र के लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं की बुनियादी जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। एम्स की स्थापना से न केवल क्षेत्र के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी, बल्कि चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
