फूड पॉइजनिंग के बारे में तो सभी ने सुना होगा, लेकिन वाटर पॉइजनिंग एक कम ज्ञात परंतु गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। वाटर पॉइजनिंग, जिसे जल विषाक्तता भी कहा जाता है, तब होती है जब व्यक्ति बहुत अधिक मात्रा में पानी पी लेता है, जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो जाता है। यह स्थिति हाइपोनेट्रेमिया के रूप में जानी जाती है, जिसमें रक्त में सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता है। चलिए इसके बारे में जानते हैं।
क्या है वाटर पॉइजनिंग
वाटर पॉइजनिंग तब होती है जब अत्यधिक मात्रा में पानी पीने से शरीर में सोडियम का स्तर घट जाता है। सोडियम हमारे शरीर के लिए आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट है जो पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। जब बहुत अधिक पानी पीया जाता है, तो सोडियम का संतुलन बिगड़ जाता है और कोशिकाओं में पानी भरने लगता है, जिससे सूजन हो सकती है। यह स्थिति मस्तिष्क में सूजन का कारण भी बन सकती है, जो कि बहुत ही खतरनाक हो सकता है।
वाटर पॉइजनिंग के लक्षण क्या है
सिरदर्द होना
उल्टी और मितली होना
भ्रम और चक्कर आना
मांसपेशियों में कमजोरी और ऐंठन
गंभीर मामलों में, दौरे और बेहोशी
वाटर पॉइजनिंग होने के क्या है कारण
अत्यधिक प्यास लगना
कुछ लोग ज्यादा प्यास के कारण अत्यधिक मात्रा में पानी पी लेते हैं, जो खतरनाक हो सकता है।
एंड्यूरेंस स्पोर्ट्स की वजह से
लंबी दूरी की दौड़ या अन्य अत्यधिक परिश्रम वाले खेलों में हिस्सा लेने वाले एथलीट कभी-कभी अपनी प्यास बुझाने के लिए बहुत अधिक पानी पी लेते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं
कुछ मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों में व्यक्ति अत्यधिक पानी पी सकता है।
वाटर पॉइजनिंग से बचाव के तरीके
वाटर पॉइजनिंग से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात है कि अपने पानी पीने की मात्रा को नियंत्रित रखें। जब प्यास लगे तभी पानी पिएं और एक ही बार में बहुत अधिक पानी न पिएं। वहीं अपने आहार में इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे कि सोडियम और पोटैशियम) को शामिल करें। अगर आपको लगता है कि आपने अत्यधिक मात्रा में पानी पी लिया है और आपको वाटर पॉइजनिंग के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
