पुणे में एक तरफ अभी जीका वायरस का कहर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। वहीं दूसरी तरफ इसे लेकर एक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। दरअसल हाल ही में पहली बार पुणे में वयस्क न्यूरो जीका वायरस का मामला सामने आया है, जो देश के चिकित्सा क्षेत्र में चिंता का विषय बन गया है। दरअसल पुणे के हडपसर में 61 वर्षीय वयस्क रोगी में न्यूरोलॉजिकल प्रभाव वाले जीका वायरस संक्रमण के लक्षण देखे गए हैं। जिसके बाद डॉक्टरों का कहना है कि वे इस रिपोर्ट को उच्च अधिकारियों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को देंगे ताकि वे इस दुर्लभ बीमारी को भारत की पहली घटना के रूप में दर्ज करें।
न्यूरो जीका वायरस कब आया चर्चा में
जीका वायरस मुख्य रूप से एडीज मच्छरों द्वारा फैलता है, जो डेंगू और चिकनगुनिया वायरस भी फैलाते हैं। यह वायरस 2015-2016 में ब्राज़ील में प्रकोप के दौरान चर्चा में आया था, जब नवजात शिशुओं में गंभीर जन्म दोष पाए गए थे। हालांकि अधिकांश जीका मामलों में लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन वायरस का न्यूरोइनवेसिव संभावनाएं गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
नोबल अस्पताल के डॉक्टर ने क्या बताया
पुणे के नोबल अस्पताल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमीत द्रविड़ ने बताया कि यह जीका वायरस का यह पहला मामला है, जिसमें जीका से पीड़ित रोगी को मेनिंगोएन्सेफलाइटिस की समस्या हुई है, नहीं तो यह दुर्लभ मामला सिर्फ ब्राजील और यूएसए में ही अभी तक पाया गया है। साथ ही उन्होंने ने बताया कि यह वायरस गर्भवती महिलाओं के लिए काफी खतरनाक होता है।
ऐसा इसलिए क्योंकि यह जन्मजात या न्यूरोडेवलपमेंटल समस्याओं की वजह बनकर भ्रूण को आजीवन परेशान कर सकता है। वहीं यह मामला काफी चिंताजनक है क्योंकि पहली बार भारत में किसी व्यक्ति को जीका से संक्रमित होने पर मस्तिष्क में सूजन विकसित होने का मामला सामने आया है।
रोगी पहले से जूझ रहा था इन समस्याओं से
वहीं पेशेंट का इलाज करने वाले डॉक्टर ने बताया कि आईसीयू में रोगी पहले से ही श्वसन संकट, आघात, कोमा, मल्टीऑर्गन विफलता और सदमे जैसी गंभीर लक्षणों से जूझ रहा था। ऐसे में पेशेंट का ट्रॉपिकल फीवर पैनल टेस्ट करवाया गया, जिसमें पुष्टि हुआ कि वह जीका मेनिंगोएन्सेफलाइटिस से संक्रमित था जोकि एक दुर्लभ और गंभीर मस्तिष्क बीमारी है। यही नहीं इसकी पुष्टि के लिए सीएसएफ टेस्ट भी करवाया गया जिसकी रिपोर्ट पॉजटिव आया है। वहीं इस रिपोर्ट की जांच सर्वोच्च निकाय, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) द्वारा भी किया गया है।
वयस्कों पर न्यूरोलॉजिकल प्रभाव
एक्सपर्ट्स क मुताबिक जीका वायरस के न्यूरोलॉजिकल प्रभाव खासकर वयस्कों में शायद ही कभी ज्ञात होते होंगे। यही वजह है कि उन्हें इग्नोर किया जा सकता है। दरअसल लोगों को लगता है कि यह एक स्व-सीमित बीमारी है। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह वायरस एन्सेफलाइटिस, मेनिन्जाइटिस और मायलाइटिस का कारण बन सकता है, जिससे गंभीर सिरदर्द, बुखार, भ्रम और दौरे पड़ सकते हैं।
ऐसे में इसे हल्के में लेने की गलती न करें। वहीं जीका का न्यूरोलॉजिकल प्रभाव जन्मजात जीका सिंड्रोम का कारण बन सकता है, जिससे शिशुओं में माइक्रोसेफली और अन्य न्यूरोलॉजिकल कमियां देखी जा सकती हैं, और अब यह वयस्कों को भी प्रभावित कर सकता है।
जीका वायरस से बचने के उपाय
लंबे आस्तीन के कपड़े पहनना
साग-सफाई का ध्यान रखें
घरों में और घर के आसपास पानी जमा न होने दें
हेल्दी डाइट लें
