हाल ही में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बीसीसीआई से क्रिकेट मैच के दौरान तंबाकू के विज्ञापन दिखाने पर रोक लगाने की मांग की है। इस निर्देश के माध्यम से सरकार ने तंबाकू के उपयोग को कम करने की पहल को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखा है। दरअसल विज्ञापनों के माध्यम से तंबाकू की प्रमोशन को बढ़ाने का काम अक्सर क्रिकेट मैचों में किया जाता है, जो खिलाड़ियों के बीच इसके उपयोग को प्रोत्साहित कर सकता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक तंबाकू का सेवन सेहत के लिए हानिकारक होता है। ऐसे में इन विज्ञापनों से इसका प्रचार करना उचित नहीं है। बता दें कि हाल ही में मैच के दौरान प्रसारित सरोगेट विज्ञापनों में कुछ सार्वजनिक हस्तियों को धुंआ रहित तम्बाकू उत्पाद निर्माताओं द्वारा निर्मित ‘इलायची’ माउथ फ्रेशनर का प्रचार करते हुए दिखाया गया था।
क्रिकेट विश्व कप के दौरान 41.3% किया गया तंबाकू का प्रचार
इंडियन काउन्सल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और वैश्विक स्वास्थ्य संगठन वाइटल स्ट्रैटेजीज द्वारा मई में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में पब्लिश एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि 2023 में स्मोकलैस तम्बाकू (एसएलटी) ब्रांडों के सभी सरोगेट विज्ञापनों में से 41.3% क्रिकेट विश्व कप के अंतिम 17 मैचों के दौरान प्रदर्शित किए गए थे। वहीं 2016-17 में विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य मंत्रालय की एक सर्वे के मुताबिक हर साल 1.35 मिलियन लोग इन विज्ञापनों से प्रोत्साहित होकर तंबाकू का सेवन करते हैं।
ऐसे में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से क्रिकेट मैदानों में धुंआ रहित तम्बाकू के विज्ञापनों पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही बॉलीवुड हस्तियों द्वारा समर्थित गुटखा के सरोगेट विज्ञापन प्रदर्शित करने पर भी रोक लगाने को कहा है।
क्रिकेट मैचों में नहीं दिखाया जाएगा सरोगेट विज्ञापन
बता दें कि क्रिकेट मैचों के लिए विज्ञापन लीगल हो सकते हैं, लेकिन इसमें तंबाकू के विज्ञापनों की उपस्थिति स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बढ़ा सकती है। सरकार ने इस पर ध्यान देते हुए अपने निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि विज्ञापन नियंत्रण के अंतर्गत तंबाकू के विज्ञापनों को क्रिकेट मैचों में दिखाने पर पाबंदी लगाई जाएगी।
वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक तंबाकू के नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए समाज में सामाजिक संचार को सुधारना और इसे कम करने के लिए सकारात्मक कदम उठाने की जरूरत है। इस पहल के तहत क्रिकेट मैचों में तंबाकू के विज्ञापनों की रोकथाम एक महत्वपूर्ण कदम है जो स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करने में मदद कर सकती है।
