Doctors Prescription: जब आप इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको जांच करने के बाद एक मेडिकल प्रिस्क्रिप्शन देता है। जिस पर मेडिसिन का नाम और कुछ टेस्ट लिखे होते हैं। उस पर्ची को डॉक्टर के अलावा मेडिकल स्टोर वाला ही पढ़ पाता है क्योंकि वो काफी कन्फ्यूज़न वाली होती है।
आपको बता दें मेडिकल गाइडलाइन के मुताबिक डॉक्टरों को हमेशा दवा की पर्ची पर पूरी बात साफ-साफ लिखनी होती है। लेकिन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली की रिसर्च में यह बात सामने आई है कि 2 में 1 दवा की पर्ची में गाइडलाइन का पालन नहीं किया जाता है। एक तरह से ये पर्चियां कंफ्यूजन वाली ही होती है।
4 हजार से ज्यादा पर्चियों का किया गया अध्ययन
आपको बता दें एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2019 से अगस्त 2020 के बीच 4,838 पर्चियों का अध्ययन किया गया जिसमें पाया गया कि इनमें से आधी पर्चियां कंफ्यूजन वाली ही थी। यह अध्ययन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेतृत्व में ही हुआ था। जिसमें यह जानना था कि गलत गाइडलाइन के पालन को नजरअंदाज कर लिखी गई पर्ची से हेल्थ पर क्या असर पड़ता है। इसमें यह भी देखा गया कि किस तरह इन पर्चियों में बिना मतलब की दवाइयां लिख होती हैं जिसके कारण आर्थिक नुकसान तो होता ही है साथ ही इससे हेल्थ पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है।
सही से इलाज नहीं
इस स्टडी में पाया गया था कि बिना मतलब की दवाइयां लिख देना सबसे बड़ी चिंता का विषय है। बता दें सांसों से संबंधित इंफेक्शन की स्थिति में भी गैस्ट्रो की दवाइयां जैसे कि पैंटोप्राजोल और रबेप्राजोल डोमपरिडोन लिख दी जाती है। इसका असर मरीजों पर पड़ता है।
आपको बता दें साल 2023 में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) की तरफ से इसे लेकर गाइडलाइन जारी की गयी थी। जिसमे डॉक्टरों को मरीजों के इलाज के लिए लिखी गईं दवाएं पर्चे पर साफ-साफ लिखनी होंगी, वह भी बड़े अच्छरों में। उनकी लिखावट ऐसी होगी कि आम लोग भी आसानी से पढ़ सकेंगे। यही नहीं, उन्हें जेनरिक दवाएं ही लिखनी होंगी।
