अगर आप भी नॉनवेज और कुछ वेजिटेरियन बनाते समय आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल करते हैं तो आज से ही इसे यूज करना बंद कर दें। दरअसल हाल ही में भारत में कर्नाटक राज्य सरकार ने मांसाहारी भोजन में आर्टिफिशियल रंगों को बैन कर दिया है। बता दें कि एक लैब टेस्टिंग में पाया गया है कि इन फूड आइटम में जो फूड कलर का इस्तेमाल किया जाता है, उसमें सनसेट येलो और कारमोइसिन की मात्रा काफी ज्यादा होता है। जोकि सेहत के लिहाज से काफी नुकसानदेह है। ऐसे में कर्नाटक सरकार का यह फैसला एक्सपर्ट्स और आम जनता के बीच हेल्थ पर इसके प्रभावों, विशेष रूप से कैंसर से संभावित संबंधों के बारे में चर्चा और बहस को जन्म दिया है।

कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम

कर्नाटक में राज्य सरकार ने इस मामले को लेकर सख्ती दिखाते हुए कहा कि अगर कोई रेस्तरां, स्ट्रीट फूड का स्टॉल या किसी भी तरह के फूड आइटम की ब्रिकी वाली स्थानों पर इस आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल किया जाता है या इस कानून को कोई तोड़ता हैं तो उसे जेल जाना पड़ सकता है, साथ ही उसे भारी जुर्माना और दंड भुगतना पड़ सकता है। दरअसल सरकार का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और सुरक्षित खाद्य उपभोग प्रथाओं को बढ़ावा देना है। वहीं आर्टिफिशियल कलर का इस्तेमाल करने से लोगों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ सकता है।

जांच में क्या पाया गया

इंडियन एक्सप्रेस में पब्लिश खबर के अनुसार कर्नाटक के स्टेट फूड एंड सैफ्टी क़्वालिटी विभाग ने 39 अलग-अलग कबाब डिशेज की जांच की थी। जिसमें से 7 सैंपल में पाया गया कि आर्टिफिशियल कलर का काफी ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। खासकर सनसेट येलो और कारमोइसिन ये दोनों कलर हेल्थ के लिए काफी ज्यादा खतरनाक है।

इन फूड आइटम में मिलाए जाते हैं आर्फिशियल कलर

बता दें कि कॉटन कैंडी, स्वीट कैंडी, अनाज, आलू के चिप्स, सॉस, आइसक्रीम और कई तरह के पेय पदार्थों में आर्फिशियल कलर का इस्तेमाल किया जाता है। मौजूदा समय में सबसे ज्यादा खाने में इस्तेमाल होने वाले आर्फिशियल कलर रेड नंबर 5 (एरिथ्रोसिन), रेड नंबर 40 (एल्यूरा रेड), येलो नंबर 5 (टार्ट्राज़िन), येलो नंबर 6 (सनसेट येलो), ब्लू नंबर 1 (ब्रिलियंट ब्लू) और ब्लू नंबर 2 (इंडिगो कारमाइन) शामिल हैं।

By tnm

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