भारत देश हर चीज में आज तरक्की कर रहा है। ऐसे में मेडिकल क्षेत्र में भी भारत पीछे नहीं हैं। आज की बार करें तो बहरत में मेडिकल की दुनिया में कई तरह के मई एक्सपेरिमेंट होते रहते हैं। ऐसे में इसमें अब आर्टिफीसियल हार्ट भी शामिल हो गया है। दरअसल IIT कानपुर ने आर्टिफिशियल हार्ट तैयार कर मेडिकल को नये मुकाम पर पहुंचा दिया है। आपको बता दें इसका परीक्षण सबसे पहले एक बकरी पर किया जाएगा। टाइटेनियम मेटल से तैयार किये गये इस हार्ट को बनाने की लागत विदेश के मुकाबले 10 गुना कम होगी। इसको LVAD यानि Left Ventricular Assist Device का नाम दिया गया है।

किस तरह के लोग ले पाएंगे इस लाभ

बता दें इस डिवाइस को वे लोग यूज़ कर पाएंगे जिन लोगों का दिल शरीर में खून पंप करने में पूरी तरह से सक्षम नहीं होता है। लेकिन इंसानों से पहले इसका परीक्षण बकरी पर होगा। आईआईटी कानपुर के बनाए इस हार्ट को ‘हृदययंत्र’ का नाम दिया गया है। यह जानकारी आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर, प्रोफेसर मनिंदर अग्रवाल ने दी है।

प्रोफेसर अग्रवाल ने क्या कहा

बता दें प्रोफेसर अग्रवाल ने बताया कि पहले इस हार्ट को सुअर में लगाने का प्लान किया गया था, लेकिन अब इसे पहले बकरी के में लगाने का प्रयास किया जाएगा। इस बात का फैसला शोध करने के बाद ही लिया गया है।

हार्ट को तैयार करने में कितने लोगों की मेहनत है

बता दें इस डिवाइस को संस्थान के विद्यार्थियों और वरिष्ठ प्रोफेसरों की देख रेख में ही तैयार किया गया है। वहीँ इस हार्ट की विदेश में उपलब्ध आर्टिफिशियल हार्ट की कीमत से एक करोड़ रुपए से ऊपर है। इस बात को ध्यान में रखते हुए IIT कानपुर और हैदराबाद अस्पताल ने रिसर्च कर इस डिवाइस को तैयार किया। इस डिवाइस को तैयार करने में करीब 10 लाख रुपये का खर्च आया है। हालांकि मार्केट में आने के बाद इसकी कीमत बढ़ सकती है।

किस तरह तैयार किया गया है डिवाइस?

कंप्यूटर की मदद से इस डिवाइस के डिजाईन को तैयार किया गया है। बता दें कि डिवाइस का डिजाइन एक पाइप की तरह होगा, जो हार्ट के एक हिस्से से दूसरे में जुड़ा होगा। इसकी मदद से खून को शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाया जाना आसान हो जायेगा।

किसी तरह का कोई वायरस नहीं

यहां बता दें की इस डिवाइस को यूज़ करने पर किसी तरह का कोई संक्रमण होने का खतरा नहीं है। डिवाइस का सरफेस खून के संपर्क  से दूर ही रहेगा। इसकी वजह है कि डिवाइस के अंदर के टाइटेनियम मेटल को इस तरह लगाया गया है कि यह आरटरी के संपर्क में ना आ पाए। अगर ऐसा होता है तो खून में मौजूद प्लेटलेट एक्टिव हो जाएंगे और खून के धक्के शरीर में बन जाएंगे। जिनसे बचने के लिए इस डिवाइस को खास तौर पर तैयार किया गया है।

By tnm

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