मां बनना हर महिला का सपना होता है। वहीं गर्भवस्था के दौरान महिलाओं को कई समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। इसलिए उन्हें अपना विशेष ध्यान रखने को कहा जाता है। लेकिन कई बार गर्भावस्था के दौरान किसी न किसी वजह से बच्चा समय से पहले ही जन्म ले लेता है। ऐसे में उन बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए काफी देखरेख की जरूरत होती है। जी हां ऐसा ही मामला बेंगलुरु से भी सामने आया है। जहां डॉक्टरों ने 25 हफ्ते की प्रीमैच्‍योर बेबी को एक नई जिंदगी देने में सफलता हासिल किया है। बता दें कि 25 सप्ताह की उम्र में भ्रूण के अधिकांश अंग ठीक से विकसित नहीं होते हैं और इसलिए समय से पहले जन्मे ऐसे बच्चों के बचने की संभावना बहुत कम होती है। वहीं बच्ची का वजन जन्म के समय 750 ग्राम था। चलिए इसके बारे में जानते हैं।

महिला को गर्भाशय-ग्रीवा डिजीज और गंभीर यूरिनरी इंफेक्शन

दरअसल बेंगलुरु के क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के डॉक्टरों ने गर्भवस्था के 25वें सप्ताह के दौरान मां में गर्भाशय-ग्रीवा और गंभीर यूरिनरी इंफेक्शन होने की पहचान की। बता दें कि Incompetent Cervical Disease की समस्या तब होती है जब गर्भाशय ग्रीवा गर्भावस्था में बहुत जल्दी खुल जाती है, कमजोर हो जाती है या छोटी हो जाती है। हालांकि गर्भावस्था के दौरान यूटीआई सूजन से जुड़ी प्रॉब्लम की वजह बनती है। जिस वजह से गर्भाशय में सिकुड़न होता है और समय से पहले डिलीवरी होने का जोखिम बढ़ जाता है। वहीं मां को गंभीर यूटीआई होने की वजह से 25 वें सप्ताह में डिलीवरी के दौरान झिल्ली का फटना शुरू हो गया। ऐसे में महिला ने 750 ग्राम वजन की एक बच्ची को जन्म दिय।

डॉक्टर ने क्या बताया बताया

क्लाउडनाइन में कंसल्टेंट नियोनेटोलॉजिस्ट और बाल रोग विशेषज्ञ मोहित सिंघल ने बताया जब हमें 25 हफ्ते की गर्भवती महिला की अक्षम गर्भाशय ग्रीवा और गंभीर यूटीआई की बीमारी का पता चला तो हम काफी परेशान थे कि बच्चा जीवित रह सकता है या नहीं। दरअसल पश्चिमी देशों में 24 से 26 सप्ताह के बीच पैदा होने वाले करीब  50-60 प्रतिशत बच्चे ही जीवित रह सकते हैं। वहीं 4 में से केवल 1 बच्चे का 25% ही जिंदा रहना संभव है। वहीं 50 प्रतिशत बच्चों में सही विकास नहीं हो पाता है। इतना ही नहीं 25% बच्चे को गंभीर न्यूरो डेवलपमेंट की प्रॉब्लम हो सकती है। जिसमें बच्चा मूवमेंट सेरेब्रल पाल्सी, सुनने में प्रॉब्लम होना, देखने में दिक्कत होनाऔर सोचने समझने आदि समस्याएं हो सकती है।

नवजात शिशु को 62 दिनों में मिली छुट्टी

डॉ. ने बताया कि समय से पहले जन्मी बच्ची को सांस लेने में दिक्कत होना शुरू हुआ। जिसके बाद बच्ची को इनट्यूबेशन और वेंटिलेटर सपोर्ट दी गई। हालांकि दूसरे दिनों बच्ची को हाइपोटेंशन या लो ब्लड प्रेशर की समस्या महसूस हुई। जिस वजह से बच्ची के ब्लड सर्कुलेशन को बैलेंस करने और ऑक्सीजन की आपूर्ति को अनुकूल बनाने के लिए दवाएं दी गई। इतना ही नहीं डॉक्टर ने बच्ची का हार्ट बीट का जांच किया तो पेटेंट डक्टस आर्टेरीओसस नामक अतिरिक्त रक्त वाहिका का पता चला। जिसे दवा के जरिए ठीक किया गया। अब बच्ची को पूरे 62 दिन बाद उसे हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई है। बच्ची का वजन अब 1.67 किलोग्राम हो गया है। बता दें कि अब मां और बच्चा दोनों ही हेल्दी हैं।

By tnm

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