जब भी किसी के घर कोई बच्चा जन्म लेता है तो उसके घर में ख़ुशी की लहर होती है। जहाँ एक तरफ बच्चे के मातापिता खुश होते हैं वहीँ घर के अन्य सदस्य भी खुश होते हैं। लेकिन ऐसे में मां और शिशु का ज्यादा ख्याल रखने की जरूरत होती है। घर ले जाने से पहले बच्चे को डॉक्टर की निगरानी में रखा जाता है, साथ ही उसके कुछ हेल्थ टेस्ट्स भी किए जाते हैं। बच्चों की सेहत अच्छी बनी रहे और किसी भी तरह के डिसऑर्डर का समय से पता लगाया जा सके, इसके लिए न्यू बोर्न स्क्रीनिंग होती है। जो हर बच्चे के लिए आज जरुरी है। तो इस बारे में हमने जालंधर के डॉ.अंशुमन सेंटर फॉर चाइल्ड हेल्थ एंड वैक्सीनेशन के डॉ. अंशुमन से और भी बाते समझी, कि आखिर ये इतना इम्पोर्टेन्ट क्यों हैं।

आखिर क्या होती है न्यू बोर्न स्क्रीनिंग

डॉ. अंशुमन ने बताया कि न्यूबोर्न स्क्रीनिंग एक पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम है, जिससे नवजात बच्चों में जेनेटिक, मेटाबॉलिक, डेवलेपमेंटल और अन्य तरह के जेनेटिक डिसऑर्डर का पता आसानी से लग सकता है। इसमें जन्म लेने के बाद 48 घंटे के अंदर बच्चे के कुछ जरूरी टेस्ट्स करवाने बेहद ही जरुरी होते हैं। इससे बच्चों में उन हेल्थ कंडीशन्स का पता लगता है, जो जन्म के समय भले ही स्पष्ट नहीं होते हैं। लेकिन अगर उनका सही समय पर इलाज न किया जाए तो वक्त के साथ वह बढ़ सकती हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में तो अब ये करवाई ही जाती है।

किस तरह से की जाती है स्क्रीनिंग

इस स्क्रीनिंग के लिए आमतौर पर बच्चे की एड़ी से ब्लड की कुछ बूंदे ली जाती हैं, जिनको लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। इस जाँच में अगर किसी तरह का कोई हेल्थ इशू नजर आता है तो तुरंत उसका इलाज किया जाता है। वहीँ अगर बच्चे में इनके लक्षण समय से पता न चलें और सही इलाज न मिले, तो इससे बच्चे की जान पर भी खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि usa में तो इस स्क्रीनिंग को किया ही जाता है। लेकिन इंडिया में इसका इतना चलन नहीं है। उन्होंने बताया कि थाइरोइड की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए, ताकि अगर बच्चे में थाइरोइड कम हो तो उसका इलाज किय जा । लेकिन अगर इसका पता ही नहीं चलेगा तो बच्चे का ठीक से ब्रेन डेवेलप ही नहीं होगा। ऐसे में पेरेंट्स को करवाना चाहिए। इसलिए पहले 3 -5 दिन में ये स्क्रीनिंग जरुर होनी चाहिए।

पेरेंट्स को रखना चाहिए ध्यान बच्चे की न्यू बोर्न स्क्रीनिंग का

डॉ. अंशुमन ने बताया कि G6PD एक एंजाइम  होता है, ये अगर बच्चे में कम हो तो इससे बच्चों को पीलिया होने का खतरा भी रहता है। वहीँ अगर स्क्रीनिंग से से इसका पता चल जाता है तो इलाज समय से हो सकता है। वहीँ उन्होंने बताया कि पेरेंट्स को बच्चे के जन्म के बाद न्यूबोर्न स्क्रीनिंग करवाने का पूरा ध्यान रखना ही चाहिए ताकि भविष्य में होने वाली प्रॉब्लम से वे बच पायें।

वहीँ उन्होंने ये भी बताया कि और भी स्क्रीनिंग होती हैं जिनमे हियरिंग स्क्रीनिंग भी शामिल है। इससे पता चल जाता है कि बच्चा दोनों कानों से ठीक से सुन पा रहा है या नहीं। अगर कोई दिक्कत मिलती है तो उसको हियरिंग ऐड दी जाती है। इसके अलावा बच्चे की ऑक्सीजन भी चेक की जाती है। अगर ऑक्सीजन का लेवल कम हो तो बच्चे को हार्ट से जुडी प्रॉब्लम होने का खतरा रहता है। ऐसे में इन स्क्रीनिंग को करवाना बेहद ही जरुरी है।  

बता दें न्यू बोर्न स्क्रीनिंग बच्चे की हेल्थ के बारे में पेरेंट्स को सही जानकारी देती है और अगर किसी हेल्थ कंडीशन का पता चले तो तुरंत उसका इलाज भी शुरू किया जा सकता है। बीमारी का सही समय पर पता चलना और इलाज मिलने, बच्चे की आने वाली जिंदगी को अच्छा बना सकता है।

By tnm

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