कहते हैं अगर दिल में काम करने का जज्बा और जीने की तमन्ना हो तो इंसान कुछ भी हासिल कर लेता है। जी हाँ इस बात को पूरा किया है देश के ऐसे व्यक्ति ने जिसके न तो हाथ हैं और न ही पैर। बावजूद इसके वे आज देश में उन लोगों के लिए काम कर रहे हैं जो दिव्यांग हैं। हम बात कर रहे हैं दिव्यांग समाजसेवी डॉ. केएस रजन्ना की, जिन्होंने महज 11 साल की उम्र में अपने दोनों हाथ पैरों को पोलियो के कारण गवां दिया था। आज उन्हें उनके काम के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
दांग रह गये सभी
आपको बता दें डॉ. रजन्ना अपना सम्मान खुद चल कर लेने की लिए पहुचें। जिसे देख समारोह में बैठे सभी ल्लोग हैरान हो गये । बता दें कि उन्होंने सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाया। इसके बाद जाकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से सम्मान ग्रहण किया। सम्मान लेने के बाद वह सभी लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे। इस दौरान उनकी मदद के लिए एक जवान आगे आया, लेकिन डॉ. रजन्ना ने मदद लेने से इनकार कर दिया। यह पल उनके पूरे जीवन की कहानी बयां करता है।
पोलियो के कारण गये हाथ पैर
बता दें पोलियो के कारण मजह 11 महीने की उम्र में डॉ. रजन्ना को अपने हाथ और पैर दोनों गंवाने पड़े थे। उन्होंने घुटनो के बल चलना सीखा और उनके हाथ कुहनी के आगे पोलियोग्रस्त हैं, लेकिन उन्होंने इसके बावजूद खुद को किसी से कम नहीं समझा। इसके उलट उन्होंने दिव्यांग लोगों के लिए काम करने का फैसला किया।
2013 में बने कमिश्नर
समाजसेवा में आने के बाद उन्होंने लगातार काम किया और 2013 में सरकार ने उन्हें दिव्यांगों के लिए राज्य कमिश्नर बना दिया। कर्नाकट के बेंगलुरू के रहने वाले रजन्ना को तीन साल के लिए यह पद दिया गया था, लेकिन उनका कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। उनकी जगह कमलाक्षी को यह जिम्मेदारी दी गई, लेकिन कर्नाटक सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ। अहम यह था कि रजन्ना को इस बारे में जानकारी तक नहीं दी गई थी कि उन्हें हटाया गया है। इसके बाद सरकार ने दोबारा उन्हें यह पद दे दिया। अब उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।
