हमारे शास्त्रों और पुराणे में बहुत से ऐसे मंत्र बताए गए हैं, जिनका अलग-अलग चीजों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जब भी हम किसी प्रकार का काम करने जाते हैं तो हम उसी के हिसाब का मंत्र पढ़ते हैं या पंडित से पूछते हैं। जैसे कि अच्छी पढ़ाई के लिए मंत्र आदि। ऐसे ही हमारी संस्कृति के अलावा दूसरी संस्कृतियों में भी इस प्रकार के मंत्र होते हैं और वहां के लोग बड़ी श्रद्धा से मानते हैं।
ऐसे ही तिब्बत और नेपाल में प्रचलित सफेद तारा के मंत्र का जाप किया जाता है। उनका मानना है कि सफेद तारा का मंत्र लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए होता है और जो लोग आपके प्यारे होते हैं खासकर उनके लिए इस मंत्र का उच्चारण किया जाता है।
सफेद तारा
उनकी अक्सर ऐसी तसवीरें बनाई जाती हैं जिसमें उनकी सात आंखें होती हैं। तिब्बत के लोग लंबे जीवन की कामना के लिए, उपचार के लिए और दीर्घायु के लिए माता सफेद तारा को याद करते हैं। उनका मानना है कि वे घावों को भरती है, फिर चाहे वे घाव शरीर पर हों या मन के अंदर। सफेद तारा को देवी के रूप में माना जाता है। वह रेशम, आभूषणों और फूलों से सजी होती हैं। वह कमल के फूल के ऊपर ध्यान में बैठी होती हैं, जिसे पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। उनका रंग चांदनी के रंग के सामान है और वह चंद्र देवी के रूप में प्रकट होती हैं।
सफेद तारा का मंत्र
सफेद तारा का मंत्र इस प्रकार है। ॐ तारे तुत्तरे तुरे मम अयुः पुण्य ज्ञान पुस्टाइमे कुरु स्वाहा। तिब्बती तरीके में मंत्र इस तरह बोला जाता है- ओम तारे तुत्तरे तुरे मामा अयुर पुणे ज्ञान पुंतिन कुरु सोहा। मंत्र का अर्थ, ओम= ओम ध्वनि आत्मा को अनंत से जोड़ती है, तारे तुत्तारे तुरे= बुद्धों के कार्यों के अवतार, मैं आपको हमेशा नमन करता हूं, माँ = मेरी, आयुर = दीर्घायु, पुण्य = जो नैतिक रूप से जीवन जीने से योग्यता प्राप्त होती है, ज्ञान = बुद्धि, पुश्तिम = वृद्धि, कुरु = ऐसा करो!, स्वाहा = जय हो, या आशीर्वाद हो।
