हमारी कुछ आदतें ऐसी भी होती हैं जो हमें और हमारे दिमाग को नुकसान पहुंचाती हैं। इन आदतों में आधुनिक जीवनशैली शामिल है। आजकल सब कुछ आधुनिक हो गया है और साथ ही हमारे रहने का ढंग भी। इसमें कोई दूसरी राय नहीं है कि दिमाग हमारे शरीर का एक जटिल अंग है, जोकि हमारे लिए विचारों, भावनाओं और शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करता है, लेकिन ऐसे कुछ कार्य होते हैं जो दिमाग के स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं।
Brain at Risk
एक्सपर्ट्स का कहना है कि आजकल की युवा पीढ़ि की आदतें बहुत खराब हैं। जल्दी सोना नहीं, ज्यादा स्क्रीन समय, व्यायाम कम करना या न के बराबर करना। नींद की कमी से बहुत से नुकसान हो सकते हैं। नींद की कमी बहुत से कार्यों में रुकावट लाती है। जंक फूड खाने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और दिमाग का विकास भी नहीं हो पाता है।
डिजिटल उपकरणों के ज्यादा प्रयोग से मानसिक थकान हो सकती है और ये उपकरण तो सेहत के लिए वैसे भी ठीक नहीं माने जाते है। इसके अलावा लगातार मादक चीजों जैसे तंबाकू, शराब या सिगरेट के सेवन से भी नुकसान होता है। दिमाग की सही सेहत के लिए अच्छी आदतें अपनानी पड़ेंगी।
Daily Routine Destroying Your Brain
जो एक बार हमारी दैनिक दिनचर्या बन जाती है फिर उसे बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है, इसलिए शुरू से ही अच्छी दिनचर्या बनानी चाहिए। गलत दुष्प्रभावों से बचने में मदद मिलेगी। बार-बार स्क्रीन पर समय बिताने से, अस्वास्थ्यकर आहार लेने से और नींद की कमी से संज्ञानात्मक विकास बाधित होता है, जिससे कभी-कभी अपरिवर्तनीय मस्तिष्क क्षति होती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि माता-पिता को बच्चों के स्क्रीन के उपयोग की निगरानी रखनी चाहिए, इसके बजाय बाहर खेलने-कूदने और पर्यावरण के साथ बातचीत करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। पोषक तत्वों से भरा खाना खिलाना चाहिए और बाहर का खाना पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। पर्याप्त नींद के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका मतलब है कि रात को सोने के समय भी बच्चों से डिजिटल डिवाइस छीन लेना चाहिए। अगर बच्चा जिद्द करे तो भी नहीं देना चाहिए। अभी उसे नहीं पता चलेगा, लेकिन आगे चलकर उसके लिए ही ठीक होगा।
जानकारी के अनुसार 40 से 50 साल के बीच के वयस्कों में मस्तिष्क की उम्र बढ़ने में तेजी लाने वाली आदतों के प्रभावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खराब नींद, उच्च स्तर का तनाव और गतिहीन जीवनशैली सबसे बड़े दोषी हैं। लगातार तनाव कोर्टिसोल का स्तर बढ़ाता है, जो एक समय बाद स्मृति और अनुभूति से संबंधित मस्तिष्क क्षेत्रों को सिकोड़ देता है।
कम नीद से आपका दिमाग स्वयं की मरम्मत करने के काबिल नहीं रहेगा और व्यायाम की कमी से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है। साथ ही रोगियों को समझना चाहिए कि अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, निकोटीन और अन्य मनोदैहिक पदार्थों जैसे उत्तेजक पदार्थ उनके लिए खराब हैं। इस आयु वर्ग के रोगियों को पूरी नींद लेने की प्राथमिकता देने को कहा गया है। ये परिवर्तन मस्तिष्क की उम्र बढ़ने की गति को काफी हद तक धीमा कर देते हैं और इससे आप संज्ञानात्मक स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकते हैं।
