जल ही जीवन है यह तो हम सब जानते हैं, लेकिन कई बार लोग जाने अनजाने दूषित पानी का सेवन कर लेते हैं, जिससे वे कई गंभीर बिमारियों के शिकार हो जाते हैं। दरअसल हाल ही में ग्रेटर नोएडा की इको विलेज 2 सोसायटी में दूषित पानी पीने से 250 लोग बीमार हो गए हैं। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य संकट को जन्म दिया है। पीड़ितों में उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी शिकायतें सामने आई हैं, जो दूषित पानी के सेवन से हो सकती हैं। सोमवार को सोसायटी के निवासियों ने इस स्थिति के लिए क्लीनिंग स्टाफ को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना है कि सोसायटी की टंकी दो दिन पहले ही साफ की गई थी, लेकिन इसके बावजूद दूषित पानी का इस्तेमाल किया गया।
इस मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत एक मेडिकल कैंप लगाया और बीमार लोगों की जांच की। कई लोगों का इलाज शुरू कर दिया गया है, लेकिन निवासियों ने पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उन्हें पानी की शुद्धता के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा हो।
दूषित पानी पीने से होने वाले नुकसान
दूषित पानी पीने से सेहत को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। इसमें डायरिया, पेट दर्द, पाचन समस्याएं, बुखार और इंफेक्शन जैसी बीमारियां शामिल हैं। लंबे समय तक दूषित पानी पीने से शरीर में फूड पॉइजनिंग, गले में इंफेक्शन और हैजा जैसी घातक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर दूषित पानी के सेवन का गंभीर असर हो सकता है, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
दूषित पानी से बचने के उपाय
वॉटर टैंक की नियमित सफाई
पानी की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए वॉटर टैंक की नियमित सफाई बेहद जरूरी है। इससे पानी में गंदगी या बैक्टीरिया के जमा होने की संभावना कम हो जाती है।
फिल्टर की जांच
वाटर फिल्टर की नियमित जांच और सफाई करें। अगर फिल्टर ठीक से काम नहीं कर रहा है, तो इसे बदलने की आवश्यकता हो सकती है।
उबला हुआ पानी पिएं
दूषित पानी के सेवन से बचने के लिए हमेशा पानी को उबालकर पिएं। उबालने से पानी में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस खत्म हो जाते हैं।
RO का इस्तेमाल
घर में RO (रिवर्स ऑस्मोसिस) सिस्टम का इस्तेमाल करें। यह पानी को अच्छी तरह से फिल्टर करता है और शुद्धता सुनिश्चित करता है।
नल और पाइपलाइन की सफाई
नलों और पाइपलाइनों की समय-समय पर सफाई करें। जमी हुई गंदगी और बैक्टीरिया इनसे पानी में घुल सकते हैं।
पानी की शुद्धता की जांच कैसे करें
लिटमस पेपर टेस्ट
एक गिलास साफ पानी में लिटमस पेपर डालें। पानी का नेचर न्यूट्रल होता है, इसलिए लिटमस पेपर का माप 7 या 8 के बीच होना चाहिए। अगर यह माप इससे अलग होता है, तो पानी पीने योग्य नहीं है।
TDS मशीन
TDS (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड्स) मशीन से पानी की शुद्धता की जांच करें। WHO के अनुसार, पानी का TDS लेवल 100 से 250 ppm (पार्ट्स प्रति मिलियन) होना चाहिए। यदि यह लेवल कम या ज्यादा होता है, तो पानी पीने योग्य नहीं है।
साबुन टेस्ट
पानी में साबुन को हल्का गिला करें। अगर पानी पीने योग्य होगा, तो उसमें झाग नहीं बनेगा या कम बनेगा। हार्ड वाटर में झाग नहीं बनता, जो यह संकेत देता है कि पानी पीने लायक नहीं है।
