सोशल मीडिया पर आये दिन कोई न कोई एक्टर या एक्ट्रेस की पोस्ट सुर्खियों में बनी रहती है। ऐसे में रणदीप हुड्डा की पत्नी लिन लैशराम हाल ही में बॉडी डिस्मॉर्फिया डिसऑर्डर (BDD) से जूझने की बात को लेकर चर्चा में आई हैं। लिन जो एक मॉडल और अभिनेत्री हैं, ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए इस मेंटल हेल्थ कंडीशन को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और लगातार मिलने वाले नकारात्मक कमेंट्स को इस समस्या की मुख्य वजह बताया। लिन के मुताबिक, ये ट्रोल्स उन्हें उनके शरीर और वजन को लेकर तरह-तरह के कमेंट्स करते हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।
सोशल मीडिया और ट्रोलिंग की वजह से बढ़ा तनाव
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लिन ने एक इंटरव्यू में बताया कि ट्रोलिंग के कारण वे काफी समय से तनाव में हैं और अपने शरीर को लेकर बहुत असहज महसूस कर रही हैं। उन्हें अक्सर वजन कम करने की सलाह दी जाती है, जिससे वे खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से हीन महसूस करने लगी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई बार उन्हें ऐसा महसूस होता है कि उनके शरीर में कोई कमी है और वे इस स्थिति से उबरने के लिए काफी संघर्ष कर रही हैं।
क्या है बॉडी डिस्मॉर्फिया डिसऑर्डर (BDD)

बॉडी डिस्मॉर्फिया एक मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने शरीर के किसी खास हिस्से को लेकर बेहद असुरक्षित महसूस करता है। उसे लगता है कि उसका शरीर सामान्य नहीं है, और इसी वजह से वह खुद को दूसरों से कमतर आंकने लगता है। इस डिसऑर्डर में व्यक्ति ओवरथिंकिंग का शिकार हो जाता है, जिससे उसकी मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है।
BDD से पीड़ित व्यक्ति को यह महसूस होता है कि उसका शरीर या कोई विशेष अंग बदसूरत है, जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता। यह डिसऑर्डर किसी भी उम्र में हो सकता है, और इससे पीड़ित व्यक्ति सामाजिक गतिविधियों से कटने लगता है।
BDD के लक्षण
व्यक्ति अपने शरीर को लेकर असंतुष्ट रहता है और इसे छुपाने की कोशिश करता है।
वह खुद को हमेशा दूसरों से तुलना करता रहता है।
हीन भावना के चलते व्यक्ति आत्मसम्मान में कमी महसूस करने लगता है।
बॉडी शेमिंग की वजह से वह सामाजिक मेलजोल से बचने लगता है।
मानसिक रूप से भ्रमित और अनिश्चित महसूस करता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव

लिन ने बताया कि इस डिसऑर्डर ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा असर डाला है। लगातार ट्रोलिंग और नकारात्मक टिप्पणियों ने उन्हें असुरक्षित और कमजोर बना दिया है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बॉडी डिस्मॉर्फिया से उबरने के लिए सही सलाह और थेरेपी की जरूरत होती है। लोगों को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए सकारात्मक सोच और सपोर्ट सिस्टम पर ध्यान देना चाहिए।
जागरूकता और समाधान
लिन लैशराम का इस तरह खुलकर अपनी समस्या के बारे में बात करना उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो खुद भी बॉडी शेमिंग या मानसिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से बचने के लिए हमें एकजुट होकर एक स्वस्थ मानसिक वातावरण बनाने की आवश्यकता है।
