डायबिटीज को एक बुरी बीमारी माना जाता है। जिसे यह हो जाती है, उसे बहुत सी चीजों को सामने करना पड़ता है और उसकी जिंदगी पहले जैसी नहीं रहती। फिर भी अगर पूरी तरह संतुलित आहार लिया जाए, लाइफ स्टाइल ठीक रखा जाए और नियमित व्यायाम किया जाए तो उससे डायबिटीज को कंट्रोल किया जा सकता है।

अगर शरीर में शूगर लेवल बढ़ जाए तो व्यक्ति को बहुत सी मुश्किलों को सामना करना पड़ता है। इसे काबू में करने के लिए दवाईयां तो हैं ही साथ में आप अपनी डाइट में मेथी और नीम की पत्ती को भी शामिल कर सकते हैं। इनका सेवन करने से बढ़ते शुगर लेवल पर रोक लग सकती है।

मेथी और नीम का ऐसे करें प्रयोग

अच्छी तरह करी पत्तों को धोकर सुखा लें। फिर एक पैन में, मेथी के बीज और जीरे को धीमी आंच पर हल्का सा भून लें जब तक कि वे सुनहरे भूरा और खुशबूदार न हो जाए। बाद में इसे ठंडा होने के लिए अलग रख दें। जब भुने हुए बीज ठंडे हो जाएंगो तो, मसाला ग्राइंडर का उपयोग करके उन्हें बारीक पीस लें। फिर करी पत्ता, हल्दी पाउडर और काली मिर्च को ग्राइंडर में डालें और सभी चीजों को इकट्ठे बारीक पीस लें। जब ये सामान बन जाए तो पाउडर को एयरटाइट कंटेनर में स्टोर कर लें। फिर इसे दो हफ्तों के लिए रख सकते हैं।

इस्तेमाल करने का तरीका

जो पाउडर आपने बनाया है, उसका 1 चम्मच गिलास गर्म पानी में मिलाएं और फिर उसे सुबह खाली पेट पिएं। इस पाउडर को सलाद, सूप पर भी छिड़क सकते हैं और साथ ही इसे विभिन्न व्यंजनों के लिए मसाले के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं।

बच्चों में Diabetes का खतरा

बच्चों में जुवेनाइल डायबिटीज, जो कि टाइप -1 डायबिटीज है, के बारे में बहुत चर्चा है। एक रिसर्च में बताया गया है कि दुनिया भर में बच्चों में टाइप -2 डायबिटीज की घटना अभी दो दशकों में बहुत बढ़ी है और माता-पिता के लिए भी यह एक गंभीर चिंता का विषय है। इसमें बच्चों की देखभाल करने की ज्यादा जरूरत होती है।

Diabetes के लक्ष्ण

थकान या नींद, बहुत ज्यादा प्यास, भूख में वृद्धि, वजन कम हो जाना, उनींदापन, धुंधली दृष्टि, भारी श्वास, पेट दर्द, उल्टी, सांसों की बदबू और बेहोशी जैसे लक्ष्ण शामिल हैं।

इलाज

माता-पिता की ये जिम्मेदारी है कि वह समय-समय में उपरोक्त लक्ष्णों के बारे में देखते रहें और अपने बच्चों का चेकअप भी कराते रहें। बता दें कि किशोर लड़कियों में लड़कों की तुलना में अधिक जोखिम होता है। चांज के लिए रक्त परीक्षण की आवश्यकता होती है। इसमें आमतौर पर उपवास रक्त शर्करा परीक्षण और यादृच्छिक रक्त शर्करा (रॅंडम ब्लड शुगर) परीक्षण शामिल होते हैं। मूत्र परीक्षण भी किया जा सकता है।

इंसुलिन के स्तर को सही करने के लिए दवाएं शामिल होती हैं। अगर ज्यादा दिक्कत हो तो इंसुलिन इंजेक्शन या इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, प्रारंभिक अवस्था में माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वह जोखिम कारकों को नियंत्रित करने की कोशिश करें। बच्चों को एक स्वस्थ जीवन शैली का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे दवाओं की आवश्यकता समाप्त होगी और जटिलताओं रुक जाएंगी।

By tnm

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