भारत में हैजा संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी ने एक स्वदेशी टीका तैयार किया है, जिसे हिलचोल नाम दिया गया है। इस टीके ने तीसरे चरण की जांच में सफलता हासिल की है और इसे सुरक्षित पाया गया है। यह उपलब्धि खासकर एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अब इन बच्चों को हैजे जैसी घातक बीमारी से सुरक्षित रखने का एक प्रभावी उपाय मिल गया है।

हिलचोल: भारत बायोटेक की नई पेशकश

हिलचोल टीका के निर्माण के लिए भारत बायोटेक ने सिंगापुर स्थित हिलमैन लेबोरेटरी से लाइसेंस प्राप्त किया है। इस टीके की खास बात यह है कि इसे मौखिक तौर पर दिया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे पोलियो का टीका दिया जाता है। यह टीका हैजा के खिलाफ एक सशक्त हथियार साबित हो सकता है। कंपनी का दावा है कि एक वर्ष में करीब 20 करोड़ खुराक का उत्पादन करने की क्षमता है। भारत बायोटेक का लक्ष्य है कि इस टीके से दुनियाभर में हर साल होने वाली चार करोड़ खुराक की कमी को पूरा किया जा सके।

हैजा के मामलों में तेजी से वृद्धि

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के मुताबिक 2021 के बाद से हैजा के मामलों में तेजी से वृद्धि देखी गई है। 2022 में जहां 4.73 लाख मामले दर्ज किए गए थे, वहीं 2023 के प्रारंभिक आंकड़ों में यह संख्या सात लाख से अधिक हो चुकी है। डब्ल्यूएचओ ने यह भी आगाह किया है कि साफ पानी, साबुन, शौचालय, और टीके की कमी की वजह से लाखों लोगों पर हैजे का जोखिम मंडरा रहा है।

दस वर्षों में सबसे अधिक मृत्यु दर

हैजा से मृत्यु दर के मामले में भी पिछले 10 वर्षों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। 2022 में 44 देशों में हैजा के मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2021 में 35 देशों ने इसके बारे में रिपोर्ट किया था। 2023 में भी यह प्रवृत्ति जारी रही है। जिन देशों में हैजा का प्रकोप सबसे अधिक देखा जा रहा है उनमें डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, इथियोपिया, हैती, सोमालिया, सूडान, सीरिया, जाम्बिया, जिम्बाब्वे और दक्षिण पूर्वी एशिया शामिल हैं। डब्ल्यूएचओ ने इस वृद्धि के लिए साफ पानी और स्वच्छता की कमी को भी जिम्मेदार ठहराया है।

हैजा का फैलाव और संक्रमण

हैजा एक जल जनित रोग है, जो दूषित जल और भोजन के सेवन से फैलता है। विब्रियो कालरी नामक बैक्टीरिया इस महामारी के फैलाव का मुख्य कारण है। यह बैक्टीरिया उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों के तटीय इलाकों में पाया जाता है और गर्म और हल्के नमकीन पानी में आसानी से जीवित रह सकता है। हैजा से संक्रमित व्यक्ति में पेट दर्द, उल्टी, और दस्त जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जो गंभीर होने पर जानलेवा साबित हो सकते हैं।

भारत की तैयारियां और आगे की राह

भारत बायोटेक का हिलचोल टीका हैजा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत समेत दुनिया भर में इस बीमारी के खिलाफ लड़ाई में मदद करेगा। कंपनी का कहना है कि टीका जल्द ही बाजार में उपलब्ध होगा, जिससे बच्चों के साथ-साथ वयस्कों को भी लाभ मिलेगा। टीके के बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण के लिए सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है।

हिलचोल की सफलता से भारत न केवल अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने में सक्षम होगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर हैजा से जूझ रहे अन्य देशों की भी मदद कर सकेगा।

By tnm

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