हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत को लेकर एक गंभीर वैश्विक अलर्ट जारी किया है, जिसमें 20 सालों के सबसे बड़े चांदीपुरा वायरस के प्रकोप की चेतावनी दी गई है। जून 2024 से 15 अगस्त 2024 तक भारत में तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के 245 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 82 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी की मृत्यु दर 33% है, जो कोरोना वायरस की तुलना में 33 गुना अधिक घातक है। इन 245 मामलों में से 64 मरीजों में चांदीपुरा वायरस (सीएचपीवी) की पुष्टि हुई है।

यह चिंताजनक स्थिति उस समय सामने आई है जब चांदीपुरा वायरस का संक्रमण भारत में लगभग समाप्ति के कगार पर था। हालांकि मौजूदा प्रकोप पिछले 20 वर्षों में सबसे बड़ा माना जा रहा है। साल 2003 में आंध्र प्रदेश में एईएस का एक बड़ा प्रकोप हुआ था, जिसमें 329 मामले सामने आए थे और 183 लोगों की मौत हुई थी। डब्ल्यूएचओ की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि मौजूदा समय में भारत के 43 जिले इस वायरस से प्रभावित हैं।

डब्ल्यूएचओ का वैश्विक अलर्ट

डब्ल्यूएचओ ने दुनियाभर के सदस्य देशों को इस स्थिति से अवगत कराया है। उसने बताया है कि जब भी किसी देश में कोई रोग प्रकोपित होता है, तो डब्ल्यूएचओ सभी सदस्य देशों को समय रहते जानकारी प्रदान करता है। इस बार डब्ल्यूएचओ ने 23 अगस्त 2024 को भारत में तीव्र एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम और चांदीपुरा वायरस के प्रकोप पर अपनी अलर्ट रिपोर्ट जारी की है।

डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस प्रकोप की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर उनकी टीम निगरानी और अन्य बचाव उपायों को लागू करने में सहयोग कर रही है। इससे पहले 2019 में कोरोना महामारी की जानकारी देरी से मिलने के कारण डब्ल्यूएचओ की आलोचना हुई थी। इसलिए इस बार उन्होंने समय रहते अलर्ट जारी किया है।

संक्रमण में कमी के संकेत

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 19 जुलाई 2024 से नए मामलों में कमी देखी जा रही है। हालांकि संक्रमण का कोई विशिष्ट उपचार या टीका अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन शीघ्र और गहन देखभाल से मरीजों की जान बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक इस वायरस के मानव-से-मानव प्रसारण का कोई मामला सामने नहीं आया है।

संक्रमण का भारत के बाहर प्रभाव नहीं

डब्ल्यूएचओ ने बताया है कि फिलहाल चांदीपुरा वायरस का संक्रमण भारत से बाहर के किसी देश में नहीं फैला है। यह वायरस एशिया और अफ्रीका के अन्य हिस्सों में भी मौजूद हो सकता है, लेकिन इसके भारत से अन्य देशों में फैलने के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं।

जोखिम मूल्यांकन और स्थिति

डब्ल्यूएचओ ने इस वायरस के प्रकोप के जोखिम को राष्ट्रीय स्तर पर मध्यम माना है और कहा है कि प्रकोप की स्थिति में बदलाव आने पर जोखिम मूल्यांकन की समीक्षा की जाएगी।

गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में अभी भी यह संक्रमण प्रभावी है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सतर्कता और सावधानी बरतने की आवश्यकता है ताकि इस वायरस के फैलाव को रोका जा सके।

By tnm

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