अकसर अस्पतालों में लाइट जाने पर मरीजों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यही नहीं कई बार लाइट जाने के बाद डॉक्टर टॉर्च की मदद से डिलीवरी भी करने लगते हैं। लेकिन ऐसा करने से बच्चे और मां दोनों को खतरा होता है। दरअसल हाल ही में दिल्ली नगर निगम (MCD) के कस्तूरबा गांधी अस्पताल में हुई बिजली कटौती और उसके बाद नवजात की मौत का मामला सामने आया है, जिससे अस्पताल प्रशासन सवालों के घेरे में आ गया है। मरीजों ने आरोप लगाया कि बिजली कटौती के दौरान दो बच्चों की डिलीवरी टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में हुई। इस घटना ने व्यापक चिंता पैदा की है, लेकिन MCD ने टॉर्च की रोशनी में प्रसव के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या है मामला

बता दें कि 22 अगस्त को दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक कस्तूरबा गांधी अस्पताल में मरम्मत कार्य के लिए बिजली की आपूर्ति बंद कर दी गई थी। इस दौरान अस्पताल के कई वार्डों में अंधेरा छाया रहा, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली कटौती की पूर्व सूचना अस्पताल प्रशासन को दी गई थी, और सभी विभागों को इसके लिए तैयारी करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि दोपहर 2 बजे से रात 8 बजे तक बिजली नहीं आई और कई वार्डों में इलाज और डिलीवरी टॉर्च की रोशनी में की गई।

MCD का आधिकारिक बयान

MCD के प्रेस एवं सूचना निदेशक अमित कुमार ने बताया कि अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) में पावर बैकअप उपलब्ध था। उन्होंने कहा कि 22 अगस्त को कस्तूरबा गांधी अस्पताल में तीन प्रसव हुए, जिनमें से दो दिन के उजाले में और एक शाम को हुआ। शाम को हुए प्रसव के दौरान बिजली आपूर्ति बहाल हो चुकी थी, इसलिए टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी का दावा गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि MCD इस बात से पूरी तरह इनकार करता है कि किसी भी प्रसव में टॉर्च का इस्तेमाल किया गया।

नवजात की मौत पर MCD की सफाई

नवजात की मौत को लेकर अमित कुमार ने बताया कि बच्चे की हालत पहले से ही गंभीर थी। प्रसव के बाद उसकी सांस नहीं चल रही थी, जिसके कारण उसे तुरंत एनआईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया। अस्पताल प्रशासन ने बच्चे के माता-पिता को उसकी स्थिति की जानकारी लगातार दी। वेंटिलेटर का पावर बैकअप ठीक से काम कर रहा था। दुर्भाग्य से पांच दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद बीमारी के चलते बच्चे की मौत हो गई।

बिजली कटौती और व्यवस्थाओं पर सवाल

बिजली कटौती के कारण अस्पताल में व्यवस्था थोड़ी अस्त-व्यस्त हो गई थी, लेकिन MCD ने यह सुनिश्चित किया कि ओटी और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में पावर बैकअप उपलब्ध रहे। हालांकि मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतें अब भी बनी हुई हैं, और इस घटना ने अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

By tnm

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