हमारे भारत में कई बार ज्यादातर शादियां रिश्तेदारी में कर दी जाती हैं लेकिन रिश्तेदारी में शादी करने को लेकर डॉक्टर्स ने एक चेतावनी दी है। डॉक्टर्स का मानना है कि रिश्तेदारी में शादी होने से कई तरह का खतरा बढ़ जाता है जिसे लेकर उन्होंने रिश्तेदारी में शादी से मना किया है। कई रिसर्च में यह बात भी साबित हो चुकी है कि एक ही ब्लड रिलेशन में शादी करने से शरीर में खून की कमी, सांस लेने में दिक्कत, चिड़चिड़ापन और खून की कमी के कारण शरीर पीला पड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस तरह की जेनेटिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। करीबी रिश्तेदारों के बीच शादी, इंटरनल ब्लड संबंधी शादी कई सारी बीमारियों का कारण बन सकती है। बच्चों में जेनेटिक विकारों का जोखिम भी बढ़ा सकता है।
रिसर्च में सामने आए नतीजे
ब्लड रिलेशन में शादी करने से कई सारी बीमारियों का खतरा बढ़ता है, जैसे- मधुमेह, हृदय संबंधी विकार, मोटापा और कुछ प्रकार के कैंसर। इन विकारों का जोखिम माता-पिता के बीच आनुवंशिक संबंध की डिग्री के साथ बढ़ता है।जैसे अधिक दूर के रिश्तेदारों, जैसे कि दूसरे चचेरे भाई-बहनों की तुलना में करीबी रिश्तेदारों के लिए जोखिम ज्यादा है। रक्त संबंध प्रजनन दर और गर्भावस्था के परिणामों को भी प्रभावित कर सकते हैं। गर्भावस्था की बर्बादी और समय से पहले प्रसव, रक्त संबंध आबादी को तपेदिक और हेपेटाइटिस जैसे संक्रामक रोगजनकों के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं, लेकिन यह उन्हें मलेरिया और अन्य रोगजनकों के प्रति कम संवेदनशील बना सकते हैं। जब समान जीन वाले दो व्यक्ति विवाह करते हैं और संतान उत्पन्न करते हैं, तो ये निष्क्रिय अप्रभावी जीन दोगुने हो जाते हैं, जिससे बच्चों में जेनेटिक प्रॉब्लम हो सकती है, हाल ही में हुई रिसर्च के मुताबिक ब्लड रिलेशन में शादी करने से दिल की बीमारी का जोखिम काफी ज्यादा बढ़ जाता है।

इन बीमारियों का रहेगा खतरा
माता-पिता के बीच जितना करीबी रिश्ता होगा, उतनी ही संभावना है कि वे जेनेटिक बीमारी होगी, जिससे उनके बच्चों में आम बीमारियां हो सकती हैं। भाई-बहनों का डीएनए 50% साझा होता है, चाचा-भतीजी का डीएनए 25% साझा होता है, और चचेरे भाई-बहनों का डीएनए 12.5% साझा होता है। करीबी रिश्तेदारों से पैदा हुए बच्चों में होने वाली कुछ बीमारियां इस प्रकार हैं, जैसे थैलेसीमिया, सिस्टिक फाइब्रोसिस, डाउन्स सिंड्रोम, इन्फैंटाइल सेरेब्रल पाल्सी, और सुनने और देखने की अक्षमता पर भी असर पड़ता है।

