कोविड महामारी के बाद अब नए फैल रहे वायरस मंकीपॉक्स ने सबकी चिंता बढ़ा दी है। अफ्रीका जैसे कई देशों में इस वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। वहीं इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस वायरस से जुड़ी जानकारी लोगों को बताई है। उनका कहना है कि भारत में मंकीपॉक्स के मामलों में बढ़ोतरी होने का खतरा बहुत कम है ऐसे में घबराने की कोई जरुरत नहीं है। हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस बीमारी को अंतराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी चिंता बताया है और इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। अधिकारी सुत्रों की मानें तो भारत में आखिरी मंकीपॉक्स का मामला इस साल मार्च में केरल में पाया गया था। आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो 2022 से भारत में कुल 30 लैब कंफर्म्ड मंकीपॉक्स के केस रिपोर्ट किए गए हैं।
नहीं है घबराने की जरुरत
स्वास्थ्य मंत्रालय संभवत एयरपोर्ट और सीपोर्ट जैसे एंट्री पॉइंट वाली जगह को सतर्क रहने की सलाह दे सकता है। साथ ही संदिग्ध मामलों को लेकर भी दिशानिर्देश दे सकता है। सुत्रों की मानें तो फिलहाल भारत में मंकीपॉक्स के मामलों की बढ़ोतरी का खतरा बहुत कम है और घबराने की भी कोई जरुरत नहीं है।

जेपी नड्डा ने की बैठक
बीते दिन यानी की शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एनसीडीसी और आसीएमआर के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने मंकीपॉक्स की स्थिति और तैयारियों की भी समीक्षा की। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बीमारी के प्रसार को रोकने और नियंत्रित करने के लिए सावधानी बरतने के उपाय किए जाएंगे।
2-4 हफ्ते तक चलने वाला वायरस है मंकीपॉक्स
बैठक में यह भी बताया गया कि मंकीपॉक्स इंफेक्शन मुख्यतौर पर 2-4 हफ्ते तक चलने वाला सेल्फ लिमिटिंग होता है और इसके बाद रोगी आमतौर पर ठीक हो जाते हैं। संक्रमण वाले व्यक्ति के साथ लंबे समय तक रहने से यह दूसरों में भी फैल सकता है। मुख्यतौर पर यौन मार्ग, शरीर/घाव द्रव के साथ सीधे संपर्क या इंफेक्श वाले व्यक्ति के गंदे कपड़ों के जरिए फैल जाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय रख रहा है निगरानी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जुलाई 2022 में मंकीपॉक्स को अंतराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बताया था। बाद में मई 2023 में इसे रद्द कर दिया था। 2022 से वैश्विक स्तर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 116 देशों से मंकीपॉक्स के कारण 99,176 मामले और 208 मौतों की सूचना दी। डब्ल्यूएचओ द्वारा 2022 की घोषणा के बाद से भारत में कुल 30 मामले इसके सामने आए हैं जिसमें से आखिरी मामला मार्च 2024 में सामने आया था। फिलहाल स्वास्थ्य मंत्रालय इस स्थिति पर बारिक नजर रख रहा है।

