कोलकाता में एक डॉक्टर के साथ हुए रेप और मर्डर के बाद शुरू हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने डॉक्टरों की मांगों के आगे झुकते हुए सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट पर विचार के लिए समिति गठित करने की घोषणा की है। डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने हर संभव कदम उठाने का आश्वासन दिया है। साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से अपनी ड्यूटी पर लौटने की अपील की है। हालांकि, डॉक्टरों के संगठन फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) ने कहा है कि वे अपने प्रतिनिधियों से चर्चा करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेंगे।
कोलकाता की घटना का देशव्यापी विरोध
घटना की बात करें तो कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में एक डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से देशभर में डॉक्टरों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। 9 अगस्त के बाद से इस घटना के खिलाफ डॉक्टरों द्वारा लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे कई सरकारी और निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते, वे हड़ताल खत्म नहीं करेंगे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ चर्चा
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यह है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सख्त सेंट्रल प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए। इसी संबंध में FORDA, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और दिल्ली के प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात की और अपनी मांगें रखीं। इसके बाद सरकार ने समिति बनाने की घोषणा की और कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
सरकार की अपील और डॉक्टरों की प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार ने डॉक्टरों की हड़ताल के चलते उत्पन्न हो रही स्वास्थ्य सेवा की समस्याओं को देखते हुए प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से ड्यूटी पर लौटने की अपील की है। FORDA ने इस अपील पर कहा है कि वे अपने सदस्यों के साथ चर्चा के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेंगे। फिलहाल डॉक्टरों का कहना है कि जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे।
यह घटना न केवल डॉक्टरों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है बल्कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा के प्रति लोगों की जागरूकता और संवेदनशीलता की भी कमी को उजागर करती है। सरकार की यह पहल डॉक्टरों के हित में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, लेकिन इसे कितनी जल्दी अमल में लाया जाता है, यह देखने वाली बात होगी।
