इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने हाल ही में चिकित्सा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष केंद्रीय कानून की मांग की है। बता दें कि यह मांग पश्चिम बंगाल में एक ट्रेनिग महिला डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या की दर्दनाक घटना के बाद उठाई गई है, जिसने देशभर के चिकित्सा समुदाय में आक्रोश फैला दिया है। इस घटना के बाद आईएमए ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को एक पत्र लिखकर चिकित्सा संस्थानों को सुरक्षित स्थान घोषित करने की अपील की है।
IMA ने जेपी नड्डा को लिखा पत्र
पिछले कुछ दिनों में देशभर के सरकारी अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टर्स ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन और हड़ताल की है। उन्होंने कोलकाता के मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ हुए बलात्कार और हत्या के मामले में न्याय की मांग की है। IMA ने अपने पत्र में कहा है कि देश के 25 राज्यों में डॉक्टरों और अस्पतालों पर हमलों को रोकने के लिए कानून तो मौजूद हैं, लेकिन इन कानूनों का प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा रहा है। इस कारण से मेडिकल कर्मियों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं।
विशेष केंद्रीय कानून की मांग
आईएमए ने अपने पत्र में स्वास्थ्य सेवा कार्मिक और नैदानिक प्रतिष्ठान (हिंसा और संपत्ति को नुकसान का निषेध) विधेयक, 2019 को पेश करने की मांग की है। उन्होंने इस विधेयक में आवश्यक संशोधनों को शामिल करने की भी अपील की है। आईएमए का कहना है कि यह विशेष केंद्रीय कानून चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत किए गए संशोधनों का भी उल्लेख किया, जिसे 2020 में संसद द्वारा पारित किया गया था, और जोर दिया कि इसी तरह का एक केंद्रीय कानून चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा के लिए बनाया जाए।
CM की सात दिन की समय सीमा तय करने पर उठा सवाल
IMA ने कोलकाता में हुई घटना के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अधिकारियों को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। इसके साथ ही उन्होंने देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी थी, अगर उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं।
इसके साथ ही आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों ने भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा मामले को सुलझाने के लिए सात दिन की समय सीमा तय करने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपनी हड़ताल जारी रखेंगे।
क्या है IMA की तीन प्रमुख मांगें
IMA ने पश्चिम बंगाल सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। दूसरी, अपराध को संभव बनाने वाली परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जाए। तीसरी, कार्यस्थल पर डॉक्टरों, खासकर महिला चिकित्सकों की सुरक्षा में सुधार के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं।
IMA की ये मांगें चिकित्सा कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर देश में हो रही हिंसा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम है। चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा।
