हाल ही में सरकार द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में भारत में लिंगानुपात में सुधार की उम्मीद जताई गई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 तक प्रति 1000 पुरुषों पर 952 महिलाएं होने की संभावना है। यह वर्ष 2023 के 943 महिलाओं के अनुपात से बेहतर है। इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2036 तक यह अनुपात और सुधर सकता है, जब प्रति 1000 पुरुषों पर 952 महिलाएं होंगी। यह आंकड़ा भारत में लिंगानुपात के सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है। वहीं यह रिपोर्ट भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में हो रहे महत्वपूर्ण बदलावों को दर्शाती है और समाज में उनकी बढ़ती भूमिका और अधिकारों की पुष्टि करती है।

2036 तक भारत की कुल जनसंख्या

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2036 की जनसंख्या में 2011 के मुकाबले महिलाओं की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है। सरकार ने अनुमान लगाया है कि वर्ष 2036 तक भारत की कुल जनसंख्या 152.2 करोड़ तक पहुंच सकती है, जिसमें से 48.8 प्रतिशत महिलाएं होंगी। यह वृद्धि 2011 में दर्ज 48.5 प्रतिशत महिलाओं की तुलना में थोड़ी अधिक है, जो कि महिलाओं के सशक्तिकरण और उनके अधिकारों के प्रति समाज के बढ़ते जागरूकता का परिणाम है।

उम्र संरचना में भी परिवर्तन

लिंगानुपात में सुधार के अलावा रिपोर्ट में जनसंख्या की उम्र संरचना में भी परिवर्तन की ओर इशारा किया गया है। प्रजनन क्षमता में गिरावट के कारण 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या का अनुपात 2011 के मुकाबले 2036 में घट सकता है। इसके विपरीत 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। यह बदलाव न केवल जनसंख्या संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक ढांचे पर भी गहरा प्रभाव डालेगा।

युवाओं की प्रजनन दर में बदलाव

रिपोर्ट में ऐज आयु विशिष्ट प्रजनन दर (एएसएफआर) के बदलावों का भी उल्लेख किया गया है। वर्ष 2016 से 2020 के बीच 20 से 24 वर्ष और 25 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं की प्रजनन दर में कमी देखी गई है। इसके विपरीत 35 से 39 वर्ष की आयु वर्ग में एएसएफआर में 32.7 प्रतिशत से 35.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि महिलाएं परिवार विस्तार के बारे में देर से सोच रही हैं, जो कि समाज में बदलते आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण का संकेत है।

साक्षरता का किशोर प्रजनन दर पर पॉजटिव असर

इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2020 में निरक्षर आबादी के लिए किशोर प्रजनन दर 33.9 थी, जबकि साक्षरों के लिए यह दर केवल 11.0 थी। यह दर्शाता है कि साक्षरता का किशोर प्रजनन दर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में भी बीते वर्षों में कमी देखी गई है। वर्ष 2020 में पुरुष और महिला आईएमआर बराबर थे, जो कि प्रति 1000 शिशुओं में 28 के स्तर पर था। पांच साल से कम उम्र की मृत्यु दर भी 2015 के 43 से घटकर 2020 में 32 हो गई है, जिसमें लड़कों और लड़कियों के बीच का अंतर भी कम हुआ है।

राजनीतिक में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी

रिपोर्ट में राजनीतिक भागीदारी में भी महिलाओं की बढ़ती सक्रियता को रेखांकित किया गया है। वर्ष 1999 तक केवल 60 प्रतिशत से कम महिलाएं मतदान करती थीं, लेकिन वर्ष 2014 के चुनावों में यह दर बढ़कर 65.6 प्रतिशत हो गई और 2019 में यह 67.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह पहली बार था जब महिलाओं की मतदान दर पुरुषों से अधिक थी, जो कि महिलाओं में बढ़ती साक्षरता और राजनीतिक जागरूकता का परिणाम है।

By tnm

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