वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और मिट्टी प्रदूषण ही नहीं पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि प्रकाश प्रदूषण भी इन्हें गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। दरअसल हाल ही में एक स्टडी में इसे लेकर चिंताजनक समस्या का खुलासा हुआ है। इस स्टडी में प्रकाश प्रदूषण से पेड़ों की पत्तियां सख्त हो रही हैं और उनके पोषक तत्वों में कमी आ रही है, जिससे शहरों में पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। बता दें कि यह स्टडी फंटियर्स इन प्लांट साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है, जिसमें चाइनीज अकादमी ऑफ साइंसेस के वैज्ञानिकों ने पेड़ों की पत्तियों पर प्रकाश प्रदूषण के प्रभाव का विश्लेषण किया।
स्टडी में क्या पाया गया
स्टडी में जापानी पेगौडा पौधे और बीजिंग में ग्रीन एश ट्री का परीक्षण किया गया। वैज्ञानिकों ने पाया कि रातभर जलने वाली स्ट्रीट लाइट्स के संपर्क में आने से इन पौधों की पत्तियां सख्त हो जाती हैं और उनके पोषक तत्वों में कमी आती है, जिससे उन्हें खाने वाले कीटों की संख्या में भी गिरावट आती है। इस स्थिति से खाद्य शृंखला और शहरों की जैव विविधता पर खतरा मंडराने लगा है।
पारिस्थितिक तंत्र और सर्केडियन रिदम प्रभावित
प्रकाश प्रदूषण सर्केडियन रिदम (24 घंटे के शारीरिक, मानसिक और व्यवहारिक परिवर्तनों का चक्र) और पारिस्थितिक तंत्र को बाधित करता है, लेकिन इसका प्रभाव उन पौधों पर विशेष रूप से गंभीर होता है जो प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश पर निर्भर रहते हैं। वैज्ञानिकों ने अपने स्टडी के लिए रातभर रोशन रहने वाले 30 स्थानों को चुना, जो प्रमुख सड़कों से 100 मीटर दूर थे। इन स्थानों से 5,500 पत्तियां एकत्रित की गईं, और उनके कीटों द्वारा खाए जाने की प्रवृत्ति और कृत्रिम प्रकाश के प्रभाव का मूल्यांकन किया गया।
कीट पतंगों की आबादी पर भारी असर
अध्ययन से पता चला कि कृत्रिम प्रकाश ने रात की चमक को करीब 10% तक बढ़ा दिया है। इससे कीट पतंगों की आबादी पर भारी असर पड़ा है। पत्तियों की सख्ती के कारण कीट उन्हें खाने से कतराने लगे हैं, जिससे कीटों की संख्या में गिरावट आई है। इसके परिणामस्वरूप शिकारी कीट और कीट खाने वाले पक्षियों की संख्या भी कम हो गई है, जो प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर रहा है। वैज्ञानिकों ने इस बात पर जोर दिया कि इस परिस्थिति पर ध्यान देना आवश्यक है, क्योंकि कीटों की घटती संख्या एक वैश्विक समस्या बन रही है।
वहीं यह स्टडी स्पष्ट करता है कि शहरों में प्रकाश प्रदूषण न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे पारिस्थितिकी तंत्र की पूरी शृंखला भी प्रभावित हो रही है, जो लंबे समय में गंभीर पारिस्थितिक असंतुलन का कारण बन सकता है।
