इन दिनों बहुत से लोग मरने के बाद अपना अंगदान कर लोगों को नई जिंदगी दे रहे हैं। इन्हीं में से एक पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य भी हैं, जिनका हाल ही में 80 वर्ष की आयु में निधन हुआ है। लेकिन अपने निधन के बाद भी दो व्यक्तियों को नई रोशनी देकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर गए हैं। ऐसे में चलिए अंगदान और ट्रांसप्लांट के बारे में जानते हैं।
भट्टाचार्य ने किये अपने कॉर्निया दान
बता दें भट्टाचार्य के कॉर्निया को कोलकाता के क्षेत्रीय नेत्र विज्ञान संस्थान में दो व्यक्तियों एक पुरुष और एक महिला में सफलतापूर्वक प्रतिरोपित किया गया। इन दोनों मरीजों को कॉर्निया की गंभीर समस्या थी, और अब सर्जरी के बाद वे दुनिया को फिर से देख सकेंगे। संस्थान के निदेशक डॉक्टर असीम कुमार घोष ने बताया कि गुरुवार की रात को की गई सर्जरी सफल रही और दोनों मरीज अब ठीक हो रहे हैं।
क्या होता है अंगदान और ट्रांसप्लांट
अंग दान और ट्रांसप्लांट एक सर्जरी प्रक्रिया है जिसमें किसी विफल अंग को किसी ऐसे व्यक्ति के स्वस्थ अंग से बदला जाता है जिसे इसकी जरूरत नहीं होती है। अंग दाता आमतौर पर हाल ही में मृत व्यक्ति होते हैं या तो अपनी मृत्यु से पहले स्वेच्छा से अपने अंग दान करते हैं। हालांकि कई कंडीशन में परिवार अपने इच्छा से मरे व्यक्ति का अंगदान करवाते हैं। वहीं अंग प्राप्तकर्ता आमतौर पर वे लोग होते हैं, जिनकी किसी बीमारी की वजह से ऑर्गन फेल या खारब हो जाते हैं। यह प्रक्रिया कई लोगों की जान बचा सकती है।
मरने के बाद अंगदान कैसे करें
अगर आप मरने के बाद अपने अंगों का दान करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए सबसे पहले अंग दाता रजिस्ट में शामिल होना होगा। हालांकि आपको अपने परिवार से भी इसके बारे में बात करना बेहद जरूरी है। वहीं आप जब चाहे अंगदान करने, वापस लेने या अपने निर्णय को संशोधित करने के लिए फिर से रजिस्टर में आवेदन कर सकते हैं।
