अकसर सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को समय पर मदद न मिलने की वजह से उनकी जान चली जाती है। वहीं बहुत से लोग सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद करने से भी कतराते है। ऐसे में बिहार सरकार ने सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब यदि कोई व्यक्ति सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की सहायता करता है और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करता है, तो उसे 10,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। यह घोषणा बिहार सरकार की मंत्री शीला मंडल ने की, जिन्होंने इस योजना का विस्तार करते हुए कहा कि इस प्रोत्साहन राशि का उद्देश्य लोगों को सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों की मदद के लिए प्रेरित करना है।

क्यों हुई राशि में वृद्धि

बिहार में सड़क हादसों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और कई बार घायलों को समय पर मदद नहीं मिल पाती, जिससे उनकी जान चली जाती है। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। पहले इस योजना के तहत मददगारों को 5,000 रुपये की राशि दी जाती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस राशि में वृद्धि से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और वे घायल व्यक्तियों की मदद करने के लिए अधिक तैयार होंगे।

सड़क हादसे के बाद का पहला घंटा गोल्डन ऑवर

वहीं प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शीला मंडल ने बताया कि सड़क हादसे के बाद का पहला घंटा, जिसे गोल्डन ऑवर कहा जाता है, किसी भी घायल व्यक्ति की जान बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि इस अवधि में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। उन्होंने बिहार के लोगों से अपील की कि वे इस पुण्य कार्य में पीछे न रहें और दुर्घटनाग्रस्त हुए व्यक्तियों की पूरी मदद करें।

योजना का क्या है उद्देश्य

इस योजना का उद्देश्य सिर्फ लोगों को आर्थिक प्रोत्साहन देना नहीं है, बल्कि उन्हें मानवता के इस महत्वपूर्ण पहलू के प्रति जागरूक करना भी है। सड़क हादसे में मदद करने वाले लोग न केवल एक जीवन बचा सकते हैं, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी ला सकते हैं। वहीं इस पहल के साथ बिहार सरकार ने सड़क हादसों में मदद करने वाले लोगों को एक महत्वपूर्ण पहचान और सम्मान देने का प्रयास किया है, जिससे समाज में सहायता करने की भावना को और मजबूत किया जा सके।

By tnm

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