हाल ही में तेलंगाना के निजामाबाद जिले से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां सरकारी अस्पताल की लापरवाही से एक मरीज को एक्सपायरी सलाइन की बोतल चढ़ाई गई। यह घटना कदेम मंडल के लिंगपुर गांव के निवासी अजरुद्दीन के साथ हुई, जिन्हें गंभीर बीमारी के चलते खानापुर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मरीज को चढ़ाई गई एक्सपायर्ड सलाइन की बोतल
बता डेब कि इलाज के दौरान अजरुद्दीन को जो सलाइन की बोतल चढ़ाई गई, वह एक्सपायर्ड थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब मरीज के भाई ने बोतल की तारीख देखी और तुरंत डॉक्टरों को इसकी जानकारी दी। हालांकि तब तक सलाइन की काफी मात्रा मरीज के शरीर में जा चुकी थी, जिसके बाद बोतल को तुरंत बदल दिया गया।
अस्पताल प्रशासन के खिलाफ किया प्रदर्शन
इस घटना से नाराज होकर अजरुद्दीन के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने इस मामले की पूरी जांच की मांग भी की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
एक्सपायरी सलाइन लगाने के नुकसान
एक्सपायरी दवा या सलाइन का इस्तेमाल मरीज के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। एक्सपायरी दवा के सेवन से एलर्जी, संक्रमण या गंभीर अंग हानि जैसी समस्याएं हो सकती हैं। एक्सपायरी डेट का मतलब होता है कि दवा या सलाइन केवल उस तारीख तक ही प्रभावी और सुरक्षित रहती है। उसके बाद कंपनी उस उत्पाद की सुरक्षा की गारंटी नहीं लेती। ऐसे में इस तरह की लापरवाही से किसी की जान तक जा सकती है, जो कि स्वास्थ्य प्रणाली की गंभीर विफलता को दर्शाता है
