इस दुनिया में एक ही बात सच है और वो है मृत्यु। कहने का मतलब है कि इस इस दुनिया में आने वाले हर एक जीव को इस्दुनिया को कभी न कभी अलविदा कहना ही होता है। लेकिन इस धरती पर आये दिन मेडिकल की दुनिया में कोई न कोई नया कारनाम होता ही रहता है। दरअसल हाल ही में जर्मनी की एक कंपनी ने क्रायोप्रिजर्वेशन के जरिये एक ऐसा काम किया है जिसके तहत शरीर को दोबारा से जीवित किया जा सकता है। इस तरह के एक्सपेरिमेंट पहले भी हो चुकें हैं जिसमे सिलिकॉन वैली कंपनी के सीईओ ब्रायन जॉनसन शामिल है। जॉनसन हमेशा जीवित रहने के लिए अलग-अलग एक्सपेरिमेंट्स करते रहते है। 46 साल के जॉनसन पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें इसमें सफलता भी मिली है। उन्होंने एंटी एजिंग प्रोडक्ट के माध्यम से अपनी बायोलॉजिकल उम्र को पांच साल घटा दिया था।
अब जर्मनी की कंपनी ने किया ये काम
आपको बता दें अब जर्मनी में एक स्टार्ट-अप एडवांस टेक्नोलॉजी के चलते लोगों को क्रायोप्रिजर्वेशन में फ्रीज करने का ऑफर चल रहा है। दरअसल मैशेबल के मुताबिक, टुमॉरो बायो मौत के बाद पूरे शरीर को सुरक्षित रखने के लिए 1.8 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। अगर कोई सिर्फ अपने दिमाग को फ्रीज करना चाहता है तो 67.2 लाख रुपये की मांग है।
लोगों को मिला है हमेशा जिंदा रहना का ऑप्शन
टुमॉरो बायो की वेबसाइट पर छपे एक आर्टिकल में कहा गया है कि कंपनी का लक्ष्य ‘एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना है जहां लोग चुन सकें कि वे कितने समय तक जिन्दा रहना चाहते हैं, वे कहां हैं, वे कौन हैं और उनके वित्तीय संसाधनों से स्वतंत्र हैं’।
इतने लोग लोग ले चुकें है लाभ
आपको बता दें मैशबल ने कहा कि छह लोगों और पांच पालतू जानवर इस तकनीक का लाभ ले चुकें हैं और उन्हें क्रायोप्रिजर्वेशन के तहत रखा जा चुका है। इसके आलावा 650 से अधिक लोग जिन्होंने इसका लाभ लेने के लिए बुकिंग करवा ली है, अब वे इंतजार में हैं कि कब उनका नंबर आयेगा।
क्रायोप्रिजर्वेशन में इतने तापमान रखा जाता है शरीर
क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक का लाभ लेने वाले लोगों के शरीर को शून्य से 198 डिग्री सेल्सियस टेम्परेचर पर रखा जाता है। वहीँ कंपनी शरीर को ‘बायोस्टैसिस’ में डाल देती है, ये एक ऐसी स्थिति है जहां सभी बायोलॉजिकल प्रक्रियाएं हमेशा के लिए बंद हो जाती हैं। वहीँ कंपनी दावा कर रही है कि भविष्य में शव को स्वेच्छा से पुनर्जीवित किया जा सकता है और मौत के कारण का इलाज हो सकता है।
इस तकनीक से मिलेगा लाभ
क्रायोप्रिजर्वेशन एक ऐसी तकनीक है जहां तापमान इतना कम होता है कि आम इंसान इसमें एक पल भी रुक नहीं सकता है। लेकिन इसी तापमान में वैज्ञानिक इस नई तकनीक के जरिये इंसानी शरीर को सालों तक सुरक्षित रख रहे हैं। हालांकि, क्रायोप्रिजर्वेशन फ्रीजिंग से अलग तकनीक है। इसमें शरीर पर बर्फ के क्रिस्टल को रोकने के लिए एक विशेष क्रायोप्रोटेक्टेंट समाधान (तरल नाइट्रोजन) शामिल होता है, जो इसके लिए हानिकारक हो सकता है।
