ल्यूपस एक तहर की ऑटो इम्यून डिजीज है। इस बीमारी से प्रभावित मरीजों के शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही हेल्दी टिश्यूज और अंगों पर अटैक करता है। वहीं यह बीमारी सबसे ज्यादा आपके जोड़ों, स्किन, किडनी, ब्लड सेल्स, ब्रेन और हार्ट को प्रभावित करता है। दरअसल ल्यूपस की वजह से होने वाली सूजन शरीर की कई अलग-अलग प्रणालियों को प्रभावित कर सकती है जिससे शरीर में कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इसके लक्षण क्या है और इसके होने की वजह क्या हैं।
ल्यूपस होने पर नजर आते हैं ये लक्षण
बता दें कि इसके लक्षण सभी लोगों में एक समान नहीं दिखते हैं मतलब कि सभी में इसके लक्षण अलग- अलग हो सकते हैं। वहीं यह लक्षण आपकी बॉडी पर जल्दी या धीरे- धीरे दिखाई दे सकते हैं। हालांकि ल्यूपस से पीड़ित अधिकांश लोगों में इसके हल्के लक्षण दिखते हैं तो कुछ समय बाद ठीक हो जाते हैं। वहीं इसके सामान्य लक्षण हैं जैसी कि-
पैर की उंगलियां सफेद या नीला होना
सांस लेने में दिक्कत होना
छाती में दर्द और बुखार की समस्या होना
आंखों का ड्राई होना
बिना वजह थकान महसूस करना
जोड़ों में दर्द, अकड़न और सूजन महसूस होना
चेहरे पर तितली के आकार के चकत्ते होना जो गालों और नाक के पुल को ढकते हैं
शरीर के अन्य हिस्सों पर चकत्ते होना
सूरज की रोशनी में जाने से शरीर पर घाव होने की समस्या होना
सिरदर्द और भ्रम की स्थिति पैदा होना
मेमोरी लॉस होना
ल्यूपस होने के क्या कारण हैं
बता दें कि अभी तक ल्यूपस की बीमारी होने का कोई वजह नहीं मिला है। वहीं यह डिजीज किसी को भी प्रभावित कर सकता है लेकिन यह 15 से 44 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं में सबसे आम है। अफ्रीकी अमेरिकी, हिस्पैनिक, एशियाई और मूल अमेरिकी महिलाओं में अन्य नस्लों के लोगों की तुलना में ल्यूपस होने की अधिक संभावना है। हालांकि हेल्थ एक्सपर्ट्स की माने तो जेनेटिक ल्यूपस किसी भी मरीज में तब विकसित होते हैं जब वे पर्यावरण की किसी ऐसी चीज़ के संपर्क में आते हैं जो ल्यूपस को ट्रिगर कर सकती है जैसे कि- सूरज के संपर्क में आने से ल्यूपस स्किन पर घाव उत्पन्न करता है। इसके अलावा कुछ लोगों की स्किन काफी सेंसटिव प्रक्रिया देना शुरू कर देती है। कई बार ल्यूपस के ट्रिगर होने का कारण कुछ दवाएं हो सकती हैं। मुख्य रूप से अटैक-रोधी दवाओं और एंटीबायोटिक दवाओं से ल्यूपस ट्रिगर होता है।
