तंबाकू हेल्थ के लिए कितना नुकसानदेह ये तो हम सब जानते हैं। वहीं भारत में फेफड़ों की बीमारियों का बोझ अनुमान से कहीं अधिक है और इसके पीछे तंबाकू सेवन और बढ़ती सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) मृत्यु दर प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। दरअसल हाल ही में लैंसेट ने एक स्टडी प्रकाशित की है जिसमें   भारत में फेफड़ों की बीमारियों से ग्रस्त लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है।

फेफड़ों की बीमारियों का वर्तमान स्थिति क्या है

फेफड़ों की बीमारियों में प्रमुख रूप से सीओपीडी, अस्थमा, और फेफड़ों के कैंसर शामिल हैं। इनमें से सीओपीडी एक प्रमुख चिंता का विषय है, जो आमतौर पर लंबे टाइम से तंबाकू सेवन के कारण होता है। भारत में सीओपीडी के मरीजों की संख्या करोड़ों में है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक भारत में फेफड़ों की बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर विश्व में सबसे अधिक है।

तंबाकू सेवन और सीओपीडी

तंबाकू सेवन फेफड़ों की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है। सिगरेट, बीड़ी, और अन्य तंबाकू उत्पादों का उपयोग सीधे फेफड़ों को प्रभावित करता है और सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बनता है। भारत में तंबाकू का सेवन व्यापक है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता के कारण स्थिति और गंभीर हो जाती है।

मृत्यु दर और स्वास्थ्य सेवा की चुनौतियां

सीओपीडी से होने वाली मृत्यु दर में भी वृद्धि हो रही है। यह रोग फेफड़ों की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे कम करता है, जिससे मरीज को सांस लेने में कठिनाई होती है जो आगे चल कर मृत्यु का कारण बन सकता है। भारत में स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पहले से ही ढीली है। ऐसे में फेफड़ों की बीमारियों से निपटने के लिए इसमें सुधार की आवश्यकता है। वहीं फेफड़ों की बीमारियों पर अनुसंधान को बढ़ावा देना चाहिए ताकि नई और प्रभावी उपचार विधियों का विकास हो सके।

समाधान और आवश्यक कदम

फेफड़ों की बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं। जिसमें तंबाकू के सेवन को नियंत्रण करना और देश के स्वास्थ्य सेवा में सुधार करना शामिल है। यही नहीं जनता को फेफड़ों की बीमारियों के खतरों के बारे में शिक्षित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियानों की आवश्यकता है। ऐसे में स्कूलों और समुदायों में स्वास्थ्य शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया जाना चाहिए, ताकि लोग तंबाकू से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक हो सके।

By tnm

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