दिल्ली एम्स में आये इन कुछ न कुछ खास होता ही रहता है। अब ऐसे में एक मरीज की जान सर्जरी करके बचायी गयी है। दरअसल कुछ दिनों पहले दिल्ली एम्स में एक मरीज भर्ती हुआ था। जिसे स्प्लीन यानि पेट में मौजूद तिल्ली की समस्या थी। इस मरीज की स्प्लीन काफी बढ़ी हुई थी। डॉक्टर ने इलाज के लिए उसकी सर्जरी के लिए बोला था।
लेकिन उसके लिए काफी समय से डोनर नहीं मिल रहा था। जिस वजह से मरीज की सर्जरी में देरी हो रही थी। वहीँ मरीज के परिवार में भी कोई डोनर नहीं था। ऐसे में मरीज की जान बचाने के लिए एम्स और सफदरजंग अस्पताल का मेडिकल स्टाफ ने पहल की। अस्पतालों के नर्सिंग ऑफिसरों ने इस मरीज को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स दान किया, अब इस दान की वजह से मरीज की सर्जरी का प्रोसेस शुरू हो जायेगा और मरीज की जान बच सकती है।
मेडिकल स्टाफ आया आगे
बता दें एम्स में भर्ती 51 साल के बिरेंद्र को ए पॉजिटिव और ए निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले सिंगल डोनर प्लेटलेट्स की जरूरत थी। लेकिन परिवार में इस ग्रुप का कोई डोनर मौजूद नहीं था। इस कारण मरीज की सर्जरी को लगातार टाला जा रहा था। वहीँ सोमवार को भी जब मरीज सर्जरी के लिए भर्ती हुआ तो डोनर नहीं था। ऐसे में एम्स और सफदरजंग का मेडिकल स्टाफ मदद के लिए आगे बड़ा ।
सात लोगों की मदद से बची मरीज की जान
बता दें एम्स के सीनियर नर्सिंग अधिकारी कनिष्क यादव ने बताया कि जब उन्हें जानकारी मिली की डोनर के अभाव में मरीज की सर्जरी में देरी हो रही है। तो इस मामले में उन्होंने नर्सिंग ऑफिसरों के ग्रुप में ब्लड डोनर की रिक्वेवेस्ट डाली। इसके बाद एम्स और सफदरजंग अस्पताल का मेडिकल स्टाफ मदद के लिए आगे आया। एम्स के नर्सिंग ऑफिसर शशिकांत और सफदरजंग हॉस्पिटल के नर्सिंग ऑफिसर देवी सिंह ने अपनी स्क्रीनिंग कराई। इसके बाद मरीज के लिए एसडीपी डोनेट किया गया और मरीज की सर्जरी में आ रही बाधा दूर हो पाई।
पुलिसकर्मी भी आगे आये
कनिष्क यादव ने बताया कि मरीज की मदद 5 स्वास्थ्य कर्मचारी और एक पुलिसकर्मी ने की है। कुछ समय में ही सात लोग डोनेशन के लिए तैयार हो गए थे। हालांकि दोनों नर्सिंग ऑफिसर के ही एसडीपी से काम चल गया। इससे कई दिनों से मरीज की सर्जरी का जो प्रोसेस रुका हुआ था वह अब पूरा हो गया है। आज मरीज की सर्जरी हो सकती है और उसकी जान बच सकती है।
