एन.एच.एस अस्पताल में जालंधर के लिवर और पेट रोग विभाग ने एक 65 साल के मरीज का बिना किसी बड़ी सर्जरी के इलाज किया है। मरीज पिछले 15 सालों से पेट में दर्द, बार-बार बुखार और पीलिया से परेशान था। यह केस डॉक्टर सौरभ मिश्रा जो कि लिवर, पाचन विज्ञान और एंडोस्कोपी विशेषज्ञ हैं उनकी देखरेख में हुआ। उनकी पूरी टीम ने बिना ऑपरेशन के एंडोस्कोपी के जरिए मरीज को राहत दिलवाई।

15 साल तक मरीज ने झेली तकलीफ

इस मरीज ने खुद को कई अस्पतालों में दिखाया, लेकिन कहीं भी उसे राहत नहीं मिली। कई जगहों पर ERCP (एंडोस्कोपिक प्रक्रिया) और अलग-अलग जांचें भी हुईं, लेकिन समस्या बनी रही। मरीज मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत परेशान था।” हर जगह कुछ नया बताया गया। किसी ने कहा इंतजार करो, किसी ने बड़ी सर्जरी की सलाह दी लेकिन कहीं राहत नहीं मिली। उम्मीद ही छोड़ दी थी,” मरीज ने कहा। आखिरकार वह NHS अस्पताल जालंधर में पहुँचा, जो आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों के लिए जाना जाता है।

जांच और चौंकाने वाली रिपोर्ट

डॉ. सौरभ मिश्रा ने मरीज की अल्ट्रासाउंड और MRI (MRCP) जांच करवाई इस दौरान उन्हें पता चला कि उसकी बाइल डक्ट (पित्त नली) में 2.7 सेंटीमीटर का बड़ा पत्थर/स्लज जमा था जो सामान्य एंडोस्कोपी से निकालना मुश्किल था। आमतौर पर 1 से 1.5 सेंटीमीटर तक के स्टोन एंडोस्कोपी से निकाले जा सकते हैं। 2.7 सेंटीमीटर का स्टोन बहुत बड़ा और खतरनाक होता है, जिससे पीलिया, इन्फेक्शन और लीवर डैमेज हो सकता है,” – डॉ. मिश्रा।

मरीज की बाइल डक्ट में फंसा था पुराना टूट हुआ स्टंट

ERCP के दौरान डॉक्टरों को पता चला कि मरीज की बाइल डक्ट में पहले से एक पुराना टूटा हुआ स्टेंट फंसा हुआ था, जिस पर समय के साथ स्लज जम गया था। यही असली कारण था, जिसकी वजह से मरीज को बार-बार पीलिया, बुखार और दर्द हो रहा था। “वो कोई नया स्टोन नहीं था, बल्कि पुराना स्टंट और स्लज का जमा हुआ कॉम्प्लेक्स था। यह एक दुर्लभ स्थिति थी,” – डॉ. मिश्रा। डॉक्टरों ने स्टंट को एंडोस्कोपिक प्रक्रिया से सावधानीपूर्वक निकाला और नया स्टेंट डाला, जिससे पित्त का प्रवाह सामान्य हो पाया।

नहीं पड़ी सर्जरी की जरुरत मरीज जल्द ही ठीक हुआ

यह पूरी प्रक्रिया बिना किसी चीरे या सर्जरी के सिर्फ एंडोस्कोपी से की गई। कुछ ही दिनों में मरीज का बुखार, पीलिया और अन्य लक्षण खत्म हो गए। “15 साल से परेशान मरीज को बिना सर्जरी राहत देना हमारे लिए भी खुशी की बात थी,” – डॉ. मिश्रा।

बीमारी की असली वजह निकली यह

मरीज की पुरानी रिपोर्ट्स देखने के बाद डॉक्टरों को शक हुआ कि यह IgG4 से जुड़ी बीमारी हो सकती है। यह एक तरह की इम्यून सिस्टम की समस्या है जिसमें शरीर की अपनी एंटीबॉडीज लिवर और बाइल डक्ट पर हमला करती हैं। रक्त जांच और बायोप्सी से पुष्टि हुई कि मरीज को यही बीमारी थी। अच्छी बात ये थी कि इसका इलाज दवाओं से संभव है और कैंसर जैसी बीमारी नहीं निकली। “इस बीमारी का सही समय पर पता लगाना बहुत जरूरी है ताकि बार-बार ऑपरेशन या जांचों से बचा जा सके,” – डॉ. मिश्रा

एन.एच.एस अस्पताल में मिलती है कई सुविधाएं

एन.एच.एस अस्पताल जालंधर में आधुनिक एंडोस्कोपी यूनिट और अनुभवी डॉक्टरों की टीम है। यहां पेट, लिवर, पीलिया, स्टोन आदि की बीमारियों का इलाज बिना सर्जरी कम समय में किया जाता है।“हम यहां मरीज की पूरी जांच करते हैं और बिना ऑपरेशन इलाज की पूरी कोशिश करते हैं। यह केस इसी सोच का उदाहरण है,” – डॉ. मिश्रा।

उम्मीद मत छोड़ो

मरीज ने कहा कि – “मैंने सोचा था अब ये दर्द मेरी जिंदगी का हिस्सा बन गया है लेकिन आज मैं बिल्कुल नया महसूस कर रहा हूं। एन.एच.एस अस्पताल और डॉ. मिश्रा का शुक्रिया”।

इसलिए जरुरी है यह मामला

पित्त की पथरी और बाइल डक्ट (पित्त नली) में पथरी आम हैं, लेकिन यदि समय पर सही पहचान और इलाज न हो तो ये गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती हैं। इस मामले में कई सालों से एक पुराना और टूटा हुआ स्टंट शरीर में था, जो बहुत ही दुर्लभ स्थिति है। इससे बीमारी की पहचान और इलाज दोनों में दिक्कतें आई और यह मरीज के लिए लंबे समय तक खतरा भी बना रहा।

ऐसे मामलों से हमें यह सिखने को मिलता है कि

• समय पर और सही तरीके से जांच होनी चाहिए (जैसे अल्ट्रासाउंड और एमआरआई)।
• एंडोस्कोपी जैसे खास प्रोसीजर करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टर होने चाहिए।
• अस्पताल में ऐसी सुविधा होनी चाहिए कि इलाज को तुरंत जरूरत के हिसाब से बदला जा सके।
* डॉक्टरों को नई और दुर्लभ बीमारियों की जानकारी होनी चाहिए ताकि बार-बार बेकार की सर्जरी या जांच न करनी पड़े। इस सफल इलाज के साथ, , एन.एच.एस अस्पताल जालंधर ने एक बार फिर यह साबित किया है कि वह इस क्षेत्र में खासतौर पर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेपेटोलॉजी और एडवांस्ड एंडोस्कोपी में बेहतरीन इलाज देने वाला प्रमुख अस्पताल है।

डॉ. सौरभ मिश्रा की अगर बात करें तो वह एमडी: मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, दिल्ली, डीएम (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी): PGI, चंडीगढ़, लिवर ट्रांसप्लांट फेलोशिप: मेदांता गुरुग्राम, 10 साल से ज्यादा का अनुभव, 200 से ज्यादा लिवर ट्रांसप्लांट्स में शामिल रह चुके हैं।

एन.एच.एस अस्पताल जालंधर के बारे में

एन.एच.एस अस्पताल जालंधर एक मल्टी-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल है जो उत्तर भारत के सबसे अच्छे एंडोस्कोपी और गैस्ट्रो विभागों में से एक है। यहां उपलब्ध सुविधाओं में एंडोस्कोपी, कोलोनोस्कोपी, ERCP, फाइब्रोस्कैन आदि शामिल हैं।

By tnm

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