सदियों पुरानी मान्यता है कि नवजात शिशु के मुलायम बालों को ट्रिम करने से बाल घने आते हैं, लेकिन क्या ये वाकई सच है? सांस्कृतिक परंपराएं इस प्रथा को बढ़ावा देती हैं, लेकिन साइंस नहीं मानता। साइंस का कहना है कि बालों का विकास खोपड़ी की सतह से कहीं ज़्यादा दूसरी कारणों पर निर्भर करता है और इसलिए शेविंग करने से इसकी नचुरल बनावट या घनेपन में कोई बदलाव नहीं आता। तो चलिए इस आर्टिकल में इससे जुड़े मिथ के बारे में विस्तार से बताया जाएगा।
ये तो आपको पता ही होगा कि जब बच्चा पैदा होता है, उसके बाल अक्सर पतले और मुलायम होते हैं। ऐसे में समय के साथ हार्मोनल चेंजे होते हैं और जेनेटिक कारणों के कारण ये स्वाभाविक रूप से घने और काले हो जाते हैं और वहीं डॉक्टर कहते हैं कि शेविंग से ये प्रोसेस तेज़ नहीं होता।
ऑप्टिकल भ्रम:
भ्रमों की बात करें तो मुंडाए गए बाल मोटे दिखाई दे सकते हैं क्योंकि इतने सारे बाल एक साथ घने दिखने लगते हैं।
सांस्कृतिक प्रथाएं:
वहीं कई समुदाय अनुष्ठानिक कारणों से बच्चे के सिर के बाल मुंडाते हैं। वे लोग इसे विज्ञान के बजाय परंपरा से जोड़ते हैं। आपको बता दें कि शिशुओं के बाल स्वाभाविक रूप से लगभग 6 से 12 महीने के आसपास घने होते हैं, ऐसे में कई माता-पिता बाल मुंडाते हैं तो उनके बाल समय के साथ बड़े और घने होने लगते हैं।
मिथक को खारिज कर देने वाली रिसर्च
2017 में ‘जर्नल ऑफ़ पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजी’ में एक रिसर्च हुई, जिसमें 100 शिशुओं को दो ग्रुप में बांटा गया। एक मुंडा हुआ बाल वाला और दूसरा बिना मुंडा हुआ। 12 महीनों के बाद देखा गया तो पता चला कि जिन बच्चों के माता-पिता के बाल घने और काले थे उन बच्चों के बाल दूसरे बच्चों के मुकाबले फ्यूचर में ज्यादा घने और काले थे। वहीं, रिसर्च दावा करती है कि शेविंग सिर के खोपड़े के पोर्स को प्रभावित नहीं करती है या नैचुरल ग्रोथ के पैटर्न को नहीं बदलती।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
