मां का दूध हमेशा से बच्चे के लिए एक अमूल्य आहार माना जाता रहा है, लेकिन अब इसे बड़ी बीमारियों के इलाज में भी उपयोगी पाया गया है। हाल ही में एक शोध में ब्रेस्ट मिल्क में पाए जाने वाले प्रोटीन के सिंथेटिक वर्जन का उपयोग करके कैंसर के इलाज में प्रॉमिसिंग रिजल्ट्स सामने आए हैं। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेस्ट मिल्क में मौजूद अल्फा-लैक्टलबुमिन (Alpha-lactalbumin) प्रोटीन से प्राप्त दवा, अल्फा1एच (Alpha1H), ने शुरुआती स्टेज के ब्लैडर कैंसर के 88% मामलों में ट्यूमर-सेल की डेथ को तेजी से बढ़ाया है।
कैंसर के इलाज में सफलता के संकेत
यह शोध स्वीडन की प्रोफेसर कैथरीना स्वानबोर्ग (Catharina Svanborg) के नेतृत्व में किया गया था। हैमलेट बायोफार्मा (Hamlet BioPharma) द्वारा 1995 में की गई इस खोज ने कैंसर के इलाज में नई संभावनाओं को जन्म दिया है। इस शोध में यह देखा गया कि अल्फा1एच दवा ने कैंसर के इलाज में अच्छे परिणाम दिए हैं। जब इस दवा को ज्यादा खुराक में दिया गया, तो इसके परिणाम और भी प्रभावी रहे। उच्च खुराक में, दवा ने ट्यूमर रिस्पॉन्स रेट को 27% से बढ़ाकर 44% कर दिया, और एवरेज ट्यूमर साइज में 59% की कमी आई।
ब्लैडर कैंसर: एक गंभीर समस्या
ब्लैडर कैंसर एक खतरनाक बीमारी है, जो 2022 में विश्वभर में 6,10,000 से ज्यादा लोगों को प्रभावित करती है। इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, और इसकी रिकरेंस रेट भी काफी हाई है। पारंपरिक उपचारों के मुकाबले, ब्रेस्ट मिल्क प्रोटीन से प्राप्त दवा ट्यूमर को बिना किसी साइड इफेक्ट के मारती है और हेल्दी टिशू को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती। इसके अलावा, यह दवा बचे हुए ट्यूमर टिशू को इस तरह बदल देती है कि वह हेल्दी सेल्स जैसे दिखने लगते हैं।
दवाओं के साइड इफेक्ट्स की चिंता नहीं
इस नई दवा के सबसे बड़े फायदे में से एक यह है कि इसमें किसी प्रकार के एडिशनल साइड इफेक्ट्स नहीं होते। पारंपरिक कैंसर उपचारों में अक्सर साइड इफेक्ट्स देखने को मिलते हैं, जो मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। हालांकि, अल्फा1एच दवा का असर सकारात्मक रहा है, और यह बिना किसी नकरात्मक प्रभाव के ट्यूमर को कम करने में सक्षम है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
