महाराष्ट्र में गुलियन बैरे सिंड्रोम (GBS) के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसके चलते अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में कुल 140 संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें से 98 मामलों में जीबीएस की पुष्टि हो चुकी है। पुणे में इस बीमारी के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।
बढ़ते जीबीएस के मामले
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, अब तक 140 संदिग्ध मामलों में से 96 मामलों में जीबीएस की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 26 मरीज पुणे शहर से हैं, जबकि 78 नए मरीज पुणे नगर निगम के गांवों से सामने आए हैं। पिंपरी चिंचवाड़ से 15 मरीज और पुणे ग्रामीण क्षेत्र से 10 मरीज सामने आए हैं। हालांकि, शुक्रवार को कोई नया मामला सामने नहीं आया।
मौतों की संख्या में वृद्धि
पिंपरी चिंचवाड़ के यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल में एक 36 वर्षीय व्यक्ति की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। इस व्यक्ति की मौत निमोनिया और श्वसन तंत्र के असर के कारण हुई। शुक्रवार को पुणे के धायरी इलाके में एक 60 वर्षीय व्यक्ति की भी मौत हुई, जिन्हें दस्त और कमजोरी के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हृदय गति रुकने से उनकी मौत हो गई।
दूषित पानी में मिला बैक्टीरिया
स्वास्थ्य विभाग ने पानी की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। पुणे शहर के विभिन्न हिस्सों से 160 पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए, जिनमें से आठ नमूने दूषित पाए गए। खासकर सिंहगढ़ रोड के कुछ बोरवेल से मिले पानी के नमूनों में ई.कोली बैक्टीरिया पाया गया है। यह बैक्टीरिया मल या पशु अपशिष्ट के प्रदूषण का संकेत देता है, जो जीबीएस संक्रमण का कारण बन सकता है।
पानी की गुणवत्ता सुधारने के प्रयास
पुणे नगर निगम के अधिकारियों ने अब तक नांदेड़, किरकटवाड़ी, धायरी और सिंहगढ़ रोड के क्षेत्रों से पानी के नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों की जांच के बाद, स्वास्थ्य अधिकारियों ने ब्लीचिंग पावर के उपयोग के लिए निर्देश दिए हैं, ताकि पानी में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट किया जा सके। पुणे नगर निगम के जलापूर्ति विभाग के प्रमुख नंदकिशोर जगताप ने बताया कि ब्लीचिंग पावर का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता सुधारने की प्रक्रिया को लागू किया जा रहा है।
सतर्कता और सुरक्षा उपाय
स्वास्थ्य विभाग और पुणे नगर निगम लगातार जीबीएस संक्रमण को रोकने और पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि वे पानी के स्रोतों की स्थिति पर ध्यान दें और किसी भी प्रकार के संदिग्ध लक्षण महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय मदद लें।
