जहां अभी भी कोरोना को लेकर कई तरह के नए वैरिएंट सामने आते रहते हैं। ऐसे में जापान में एक वायरस के आने से सभी दहशत में हैं। दरअसल ये वाय़रस का बैक्टीरिया बेहद खतरनाक तरीके से इंसानों को मौत की नींद सुला रहा है। ये बैक्टीरिया इंसानों का मांस खाता है, जिससे पीड़ित की 48 घंटे में या इसके भीतर ही मौत हो रही हैं। वहीँ इसे लेकर डॉक्टर्स और मेडिकल एसोसिएशन ने एक एडवाइजरी जारी कर लोगों को इससे बचने और बचाने के उपाय बताएं हैं। बता दें कि ये वायरस बहुत तेजी से जापान के टोक्यो के लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है। वहीँ जापान में इसके करीब 1000 केस सामने आ चुके हैं। साथ ही ये बीमारी जापान से निकलकर ब्रिटेन, फ्रांस, स्वीडन, आयरलैंड और नीदरलैंड में भी पहुँच चुकी है।
30 से अधिक उम्र के लोग बन रहे इसके शिकार
बता दें अकेले टोक्यो में 2024 की पहली छमाही में 145 मामले दर्ज हो चुके हैं। एक स्थानीय समाचार पत्र असाही शिंबुन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकांश मामले 30 से अधिक उम्र के लोगों में मिल रहे हैं। वहीं इस बीमारी की मोर्टालिटी रेट 30% पाई गई है। जापानी न्यूज़ एजेंसी केक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है कि 2 जून 2024 तक तो जापान में इस बीमारी के 977 मामले सामने आ चुके हैं जबकि पिछले साल कुल 941 मामले दर्ज किए गए थे।
GAS बैक्टीरिया की वजह से ये STSS बीमारी
जापान ने इस बीमारी का नाम स्ट्रेप्टोकोकल टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम यानी (STSS) दिया है। वहीं जिस बैक्टीरिया की वजह से ये वायरस फैल रहा है उसे ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकस (GAS) का नाम दिया गया है। ये बीमारी बच्चों और बुजुर्गों में तेजी से फैलती है। जापान के साइंटिस्ट के मुताबिक इस वायरस का केस पहली बार जापान में आया है। ये कैसे आया है और कहां से ये पैदा हुआ है इस पर रिसर्च चल रही है।
किस तरह से करता अटैक ये वायरस
जापान की एक न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई शख्स इस बैक्टीरिया (GAS) के संपर्क में है तो ये उस इंसान के शरीर में सबसे पहले एक जहरीला पदार्थ पैदा करता है। जिससे शख्स को जलन और खुजली होने लगती है। फिर ये बैक्टीरिया सीधे इंसान के ऊतक यानी टिश्यू पर अटैक करता है जिससे शरीर में सूजन बढ़ जाती है। सूजन बढ़ने का मतलब है कि ये बैक्टीरिया अब उस इंसान के मांस को खाने के लिए तैयार है। वहीँ अगर समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो दो दिनों के भीतर यानी 48 घंटे में मरीज की इस बीमारी से जान भी चली जाती है।
चोट लगने पर जल्दी पकड़ में
वहीँ एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर किसी शख्स को चोट लगी है और उसके घाव खुले हैं तो ये आसानी से आपको अपनी चपेट में ले सकता है। साथ ही गंदगी वाली जगहों पर भी आपके जाने से आप इस वायरस की चपेट में आ सकते हैं। चिंता करने वाली बात ये है कि अगर ये वायरस इंसान के शरीर में चला जाता है तो वो शरीर के अंगों को खराब करने में सक्षम है यानी भविष्य में पीड़ित के शरीर का वो हिस्सा काम नहीं करेगा।
लक्षण क्या है इसके
बता दें अगर ये बैक्टीरिया किसी इंसान के शरीर में प्रवेश कर गया है तो उसे
बुखार
ठंड लगना
मांसपेशियों में दर्द
सिरदर्द की शिकायत
गले में खराश और दर्द
खुजली
लिंफ नोड्स यानी गले की छोटी-छोटी ग्रंथियों में सूजन आना
जीभ के भीतरी हिस्से के ऊपर लाल और सफेद रंग के धब्बे पड़ना शामिल हैं
इसका उपाय क्या है
अगर कोई शख्स इस बीमारी से पीड़ित है तो उसके लक्षण देखकर तुरंत उसे डॉक्टर के पास ले जाएं। इस बीमारी से निपटने के लिए J8 नाम की वैक्सीन है जिसे पीड़ित को लगाई जाती है। जिससे धीरे-धीरे आराम मिलना शुरू हो जाता है बशर्ते अगर मरीज ने लक्षण दिखने के तुरंत बाद इलाज लिया है तो इससे मरीज बचने की उम्मीद बढ़ जाती है।
किस तरह से बचा जा सकता है
जापान में STSS के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और ये यूरोप के 4-5 देशों में भी फैल रहा है इसलिए भारत समेत पूरी दुनिया चिंता में इस समय ये चिंता का विषय बना हुआ है। वहीँ भारत में भी जापान समेत यूरोप से लोग आते हैं। हालांकि अभी भारत में ऐसा कोई केस आया नहीं है
लेकिन इस खतरनाक बीमारी से बचने के लिए लोगों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा।
कोरोना काल में उठाए गए कदमों को फॉलो करें
नियमित तौर पर अपने हाथ साबुन और पानी से धोते रहें
किसी भी खुले घाव की देखभाल अच्छे से करें, उन्हें एंटीसेप्टिक दवा से साफ करें और उन्हें पट्टियों या किसी साफ कपड़े से ढक कर रखें
हो सके तो भीड़भाड़ वाले इलाके और गंदगी वाले इलाकों में जाने से बचें
मुंह पर मास्क का यूज़ करें
बीमार लोगों से दूरी बना लें
अपने निजी सामानों जैसे तौलिया, कपड़े या अपने बर्तन तक एक दूसरे से शेयर ना करें। साथ ही उन्हें हमेशा साफ रखें और दोबारा इस्तेमाल करने से पहले उन्हें अच्छी तरह साफ करें
