महाराष्ट्र के पुणे शहर में गुलेन बैरी सिंड्रोम (GBS) के मामलों में अचानक वृद्धि देखने को मिली है। हाल ही में स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को इस दुर्लभ बीमारी के आठ नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे कुल मामलों की संख्या 67 हो गई है। इस बीच राज्य स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति का सामना करने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) का गठन किया है, जो मामले की जांच कर रही है।

गुलेन बैरी सिंड्रोम क्या है

गुलेन बैरी सिंड्रोम एक दुर्लभ और गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो शरीर की मांसपेशियों को कमजोर करने का कारण बनती है। इसमें शरीर के अंगों में गंभीर कमजोरी, झुनझुनी और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बैक्टीरिया या वायरल संक्रमण इस बीमारी का मुख्य कारण होते हैं, क्योंकि ये रोगियों की इम्यूनिटी को कमजोर कर देते हैं। हालांकि इस बीमारी के मामलों में मृत्यु दर बहुत कम है और अधिकांश मरीज सही इलाज से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

गुलेन बैरी सिंड्रोम के लक्षण

गुलेन बैरी सिंड्रोम के लक्षण धीरे-धीरे प्रकट होते हैं, और ये आमतौर पर निम्नलिखित होते हैं:

कमजोरी और झुनझुनी

यह लक्षण आमतौर पर पैरों से शुरू होकर हाथों और चेहरे तक फैल सकता है।

मांसपेशियों में कमजोरी

इस स्थिति में रोगी को खड़े होने, चलने या किसी वस्तु को उठाने में कठिनाई हो सकती है।

सांस लेने में दिक्कत

स्थिति गंभीर होने पर, सांस लेने में परेशानी हो सकती है।

धड़कन और रक्तचाप में गड़बड़ी

अनियमित हृदय गति और रक्तचाप की समस्याएं भी हो सकती हैं।

चेहरे की मांसपेशियों पर असर

चेहरे की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं, जिससे मुंह और आंखों के आस-पास असामान्यताएं हो सकती हैं।

चलने में असमर्थता

गंभीर मामलों में मरीज पूरी तरह से चलने-फिरने में असमर्थ हो सकते हैं।

पुणे में वर्तमान स्थिति

पुणे में जीबीएस के कुल मामलों में अब तक 13 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं। पुणे नगर निगम की सहायक स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. वैशाली जाधव के अनुसार कुल 67 मामलों में से 43 पुरुष और 24 महिलाएं शामिल हैं। इन मामलों पर राज्य स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय चिकित्सा संस्थानों की टीम द्वारा निगरानी रखी जा रही है।

रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) की सक्रियता

राज्य स्वास्थ्य विभाग ने इस बीमारी में वृद्धि की जांच के लिए एक रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) का गठन किया है। इस टीम में राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) के वैज्ञानिक, बी जे मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के HOD, और राज्य महामारी विशेषज्ञ समेत अन्य महत्वपूर्ण सदस्य शामिल हैं।

हालांकि यह बीमारी गंभीर हो सकती है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि इससे महामारी फैलने का खतरा नहीं है और अधिकांश मरीज इलाज से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *