अकसर हॉस्पिटल में जब किसी पेशेंट की कंडीशन बहुत ज्यादा क्रिटिकल हो जाती है तो उसे एक बेहतर इलाज देने के लिए दूसरे हॉस्पिटल में रेफर किया जाता है। ये तो हम सब जानते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं रेफर को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों के लिए कुछ दिशानिर्देश जारी किये हैं। दरअसल हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा पेशेंट को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर करने की प्रक्रिया में विसंगतियों और जवाबदेही की कमी को ध्यान में रखते हुए पहली बार हॉस्पिटल के लिए रेफर से जुड़ी गाइड लाइन जारी किया है। चलिए इन गाइड लाइंस के बारे में जानते हैं।

जरूरत पड़ने पर पेशेंट को तुरंत रेफर करें 

रेफर से जुड़ी नई गाइड लाइन के मुताबिक अस्पतालों के भीतर इस बात पर फोकस किया गया है कि अगर किसी पेशेंट को विशेष देखभाल, नैदानिक ​​मूल्यांकन या परामर्श की जरूरत पड़ती है और वो चीज अस्पताल में नहीं मिल सकता है तो पेशेंट को दूसरे अस्पताल में रेफर करने की प्रक्रिया को तुरंत शुरू करना चाहिए।

मानकीकृत प्रोटोकॉल लागू करना

इस गाइडलाइन के मुताबिक अगर रेफर करने में किसी तरह की प्रॉब्लम आती है तो हॉस्पिटल की तरफ से तुरंत एक मानकीकृत (Standardized) प्रोटोकॉल लागू करना होगा।   

रेफर करने से पहले advisor से सलाह लें

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइन के मुताबिक किसी भी पेशेंट को रेफर करने से पहले हॉस्पिटल में डॉक्टर अपने किसी परामर्शदाता से सालह करेगा। फिर ही किसी पेशेंट को दूसरे विभाग में रेफर किया जाएगा। वहीं पोस्टग्रैजूएट रेजिडेंट फिज़िशन अपने परामर्शदाताओं के बिना सलाह किये खुद से किसी पेशेंट को रेफर नहीं करेगा।

डॉ. अतुल गोयल ने बताया

हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस डॉ. अतुल गोयल ने एक रिपोर्ट में बताया कि रेफर करने की जो प्रक्रिया है किसी भी हॉस्पिटल में पेशेंट को अच्छी देखभाल, नैदानिक ​​मूल्यांकन या परामर्श का एक महत्वपूर्ण घटक है। वहीं हॉस्पिटल में कई बार खराब कोडिनेशन और संचार, अस्पष्ट प्रक्रियाएं, गैर-मानकीकृत प्रारूप और स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए अपर्याप्त प्रशिक्षण जैसी समस्याएं देखने को मिलता है। लेकिन इससे पेशेंट की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही उन्होंने ने बताया कि कई बार हॉस्पिटल में किसी बीमारी से जुड़ा एक्सपर्ट्स उपलब्ध नहीं होता है तो इससे पेशेंट को इलाज मिलने में देरी हो सकती है। ऐसे में ये जरूर है कि पेशेंट को रेफर कर उसे उचित इलाज प्रदान किया जाएं।

By tnm

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *