फीमेल अगर लीवर डोनेट करती हैं तो वे शादी के बाद भी अपनी लाइफ को अच्छे से जी सकती हैं। यहाँ तक की वे मां बनने का सुख भी प्राप्त कर सकती हैं, ये कहना है गुरुग्राम के मेदंता हॉस्पिटल के सीनियर डायरेक्टर और हेपेटोलॉजी डॉ. नीरज सराफ का। दरअसल आज जालंधर के पटेल हॉस्पिटल ने गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल के साथ मिलकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया।

इस कार्यक्रम की शुरुआत पटेल हॉस्पिटल के एचओडी, सेंटर ऑफ लिवर एंड डाइजेस्टिव केयर डॉ. वरुण गुप्ता ने सभी का स्वागत करके की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. नीरज सराफ मौजूद रहे। वहीँ पटेल हॉस्पिटल के मेडिकल superintendent डॉ. स्वपन सूद ने डॉ. नीरज को फूलों का गुलदस्ता दे कर स्वागत किया। 

आज के कार्यक्रम का मुख्य मकसद जालंधर के लोगों को लीवर और लीवर ट्रांसप्लांट से जुडी बातों के बारे में जागरूक करना है। वहीँ डॉ. वरुण ने बताया कि जल्दी ही इस हॉस्पिटल में मेदांता हॉस्पिटल के सहयोग से हर महीने लीवर पेशेंट के लिए ओपीडी शुरू की जाएगी। जिन पेशेंट को लीवर ट्रांसप्लांट के इलाज के लिए  दिल्ली, मुंबई और अन्य शहर में जाना पड़ता था, वे अब पटेल हॉस्पिटल में ही इसका लाभ उठा सकेंगे। इसके बारे में और भी अधिक जानकरी डॉ. नीरज ने दी।  

लीवर ट्रांसप्लांट मामले बढ़ें हैं

डॉ. नीरज ने बताया कि पहले लीवर से जुडी बीमारी को लेकर बहुत कम पेशेंट देखने को मिलते थे। लेकिन अब पिछले 10 सालों में इसके मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसमें भी लीवर ट्रांसप्लांट के लगभग 4300 से ज्यादा के केस मेदांता कर चूका है। उन्होंने बताया कि जिन पेशेंट का ट्रांसप्लांट हुआ है उनका अभी भी फॉलोअप जारी है। वे सभी अपनी लाइफ को आराम और मजे से जी रहे हैं।

लीवर डोनेट करना महिलाओं के लिए सेफ 

डॉ. नीरज ने बताया कि इसमें ज्यादातर मामले फीमेल पेशेंट के हैं। इसके बारे में उन्होंने प्रेजेंटेशन के माध्यम से बताया, उनके पास कई फीमेल ऐसी हैं जिन्होंने अपने परिवार में ही लीवर डोनेट किया है और वे शादी के बाद अच्छे से जिंदगी को जी रही हैं। उन्होंने बताया कि एक महिला ने तो शादी के बाद ही अपने पति को लीवर डोनेट किया था, जिसके बाद उन्हें किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई है। उस महिला ने मां बनने का भी सुख प्राप्त किया है।

डायबिटिक पेशेंट नहीं कर सकता डोनेट

डॉ. नीरज ने बताया कि डायबिटिक पेशेंट किसी को भी लीवर डोनेट करने में सक्षम नहीं है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि डोनेट करने वाले की उम्र 18 से ऊपर और 55 साल के बीच की होनी चाहिए। जब कोई भी डोनर लीवर डोनेट करता है तो उसे हॉस्पिटल में 5 – 7 दिनों तक रहना होता है। वहीँ लीवर लेने वाले को 2 -3  हफ्ते हॉस्पिटल में रहना होता है। डोनर का लीवर regenerate कर जाता है, जबकि पेशेंट की मेडिसिन 3 -6 महीने तक चलती है।

कैसे पता चलता है कि लीवर में गड़बड़ी है

बेसिक टेस्ट के माध्यम से पता लगाया जा सकता है कि लीवर में कुछ दिक्कत आ रही है  

  • ब्लड टेस्ट
  • फाइब्रोस्कैन
  • अल्ट्रासाउंड
  • किस तरह से रखें लीवर का ध्यान
  • हाई फ्रक्टोज वाली चीजें नहीं लेनी हैं
  • अल्कोहल से दूरी बना लें
  • एक्सरसाइज को हर रोज अपनी दिनचर्या में शामिल करें  

Robotic liver resection

डॉ. ने बताया कि उनके यहाँ पर Robotic liver resection किया जाता है। इसमें लीवर को काटने और रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए अल्ट्रासोनिक ऊर्जा उपकरणों या इलेक्ट्रोकॉटरी उपकरणों का उपयोग करते हैं। यदि आप लेप्रोस्कोपिक या रोबोटिक सर्जरी करा रहे हैं, तो आपका सर्जन आपके शरीर से कटे हुए लिवर को बाहर निकालने के लिए 2 से 5 इंच का अतिरिक्त चीरा लगा सकता है।

लीवर डैमेज होने के कई Stage हैं

  • स्टेज 1 : स्वस्थ लीवर
  • स्टेज 2 : लीवर क्षति की शुरुआत
  • स्टेज 3 : मध्यम लीवर क्षति
  • स्टेज 4 : महत्वपूर्ण लीवर क्षति
  • स्टेज 5 : गंभीर लीवर क्षति (सिरोसिस)

लिवर खराब होने के जोखिम कारण क्या हैं  

ओबेसिटी

शरीर का वजन बढ़ने की स्थिति में अतिरिक्त फैट, लिवर में भी जमा होने लगता है, जिससे लिवर का सामान्य कामकाज प्रभावित हो जाता है। यह आगे चलकर लिवर सिरोसिस या फिर लिवर में घाव जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।

टाइप 2 डायबिटीज

मधुमेह से गैर-अल्कोहलिक फैटी लीवर रोग का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में, भले ही आप बहुत कम या बिल्कुल भी शराब न पीते हों, आपके लीवर में वसा जमा हो जाती है। टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित कम से कम आधे लोगों को गैर-अल्कोहल फैटी लीवर रोग है।

डिसलिपिडेमिया

अगर कोई डिसलिपिडेमिया से ग्रसित है तो उसे लिवर से जुड़ी प्रॉब्लम होने का खतरा अधिक रहता है। दरअसल खून में लिपिड यानी ट्राइग्लीसेराइड और कोलेस्ट्रॉल जैसे फैट वाले पदार्थ का स्तर बहुत ज्यादा या बहुत कम हो जाता है जिसका सीधे तौर पर लिवर प्रभावित होती है।

हाई ब्लड प्रेशर का रिस्क

हाई ब्लड प्रेशर के कारण लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और वह फैलने लगता है और सिरोसिस का खतरा भी बढ़ सकता है। हाई ब्लड प्रेशर और नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिसीज (NAFLD) का भी संबंध है। इसलिए कहा जाता है कि अगर किसी को हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है तो आगे चलकर उसके लिवर को भी खतरा हो सकता है।

मेटाबोलिक सिंड्रोम (एमएस)

मेटाबोलिक सिंड्रोम स्थितियों का एक समूह है जो एक साथ घटित होता है, जिससे हृदय रोग, स्ट्रोक और टाइप 2 मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। वही ये सभी जोखिम  के बढ़ने से लिवर गंभीररूप से प्रभावित होता है।

लीगल डॉक्यूमेंट के साथ ही ट्रांसप्लांट किया जाता है

डॉ. नीरज ने बताया कि लीवर ट्रांसप्लांट करने वाले हर हॉस्पिटल की एक कमेटी बनी हुई होती है। जिसमे हॉस्पिटल के डॉक्टर्स,  मेम्बेर्स और ज्यूडिशियरी के लोग भी शामिल होते हैं। इसके आलावा Ehtically भी सभी डाक्यूमेंट्स , रिलेशनशिप प्रूफ देखा जाता है। लीवर डोनेट करने वाले की साडी जानकरी ली जाती है कि आखिर जिसे वो अपना लीवर डोनेट कर रहा है उसका उससे क्या रिश्ता है।

उन्होंने ये भी बताया कि लीवर ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की मौजूदगी और उसमे आने वाले खर्च की सुविधा को देखा जाता है। उसी के अनुसार लीवर ट्रांसप्लांट के प्रोसेस को पूरा किया जाता है। आगे उन्होंने बताया कि सके लिए स्टेट गवर्नमेंट की तरफ से फण्ड नहीं मिलता है। इसलिए इसमें 20 -25 लाख रुपयों का खर्च आता है।

वहीँ उन्होंने ये भी बताया कि चंडीगढ़ के पीजीआई हॉस्पिटल में इसकी सुविधा को डेवेलोप करने का काम किया जा रहा है।

अवेयरनेस और प्रिवेंशन कैंपेन चलाये जा रहे हैं

उन्होंने बताया कि इसके बारे में और अधिक जागरूकता देने के लिए मेदांता हॉस्पिटल की तरफ से अवेयरनेस कैंपेन चलाये जा रहे हैं। इसी के साथ प्रिवेंशन पर भी काम किया जा रहा है। इसके आलावा लीवर ट्रांसप्लांट के लिए बीमा कंपनी की तरफ से कवर भी दिया जाता है, अगर पेशेंट ने ज्यादा नंबर वाला बीमा करवाया होता है।

डॉ. स्वपन सूद ने क्या कहा

पटेल अस्पताल के मेडिकल Superintendent डॉ. स्वपन सूद कहा कि मेदांता अस्पताल समूह के साथ साझेदारी उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने और हमारे रोगियों के लिए सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त करने के लिए है।

आगे उन्होंने कहा कि हम चिकित्सा छेत्र में सबसे आगे रहने और मरीजों को प्रदान की जाने वाली देखभाल की गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। इस साझेदारी से जालंधर के लीवर पेशेंट को काफी लाभ मिल सकेगा।

वहीँ इस मौके पर पटेल हॉस्पिटल के कई स्टाफ मेम्बेर्स मौजूद रहे।

By tnm

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