हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत महत्व होता है। एक तो ये त्योहार नए साल का पहला त्योहार होता है तो लोग इस दिन स्नान और दान भी करते हैं। मकर संक्रांति के दिन अन्न, तिल, गुड़, कपड़े, और पैसे दान करने की परंपरा चली आ रही है और एक पतंगबाजी की परंपरा भी बहुत लोकप्रिय है।
मकर संक्रांति पर पतंग क्यों उड़ाते हैं?
इसके लिए बहुत सी कहानियां प्रचलित हैं, जिसमें से एक है कि पतंग उड़ाने की शुरुआत भगवान राम ने की थी। उन्होंने मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाई थी और ये पतंग उड़ते-उड़ते इंद्रलोक चली गई थी।
स्वास्थ्य कैसे रहता है बेहतर
पतंगबाजी अक्सर लोग खुले आसमान में करते हैं या फिर छत पर चढ़कर उड़ाते हैं। आपको बता दें कि इस दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और सर्दी के मौसम में सूर्य की किरणें सीधी धरती पर पड़ती हैं और ऐसे में पतंग उड़ाते समय शरीर में धूप लगती है, जिससे शरीर को विटामिन डी भी मिलता है और सर्दियों में होने वाली बीमारियां कम हो जाती हैं।
सावधानियां
पतंग उड़ाते समय मजा और रोमांच दोनों का एहसास होता है। लेकिन बहुत जरूरी है कि पतंग उड़ाते समय आप कुछ सावधानियों का भी ध्यान रखें। जैसे कि पतंग उड़ाते समय खुली जगह का चयन करें। हालांकि, छत पर जाते समय खास ध्यान रखें कि छत चारों तरह से खुल न हो और प्रॉपर तरीके से इसके चारों ओर रेलिंग लगी हो। पतंग उड़ाते समय बिजली की तारों और खंभों से दूरी बनाकर रखें। कभी भी सड़क या फिर सड़क के किनारे पतंग न उड़ाएं।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें।
