असम के कछार जिले के दमचेरा में पुलिस ने एक वाहन से कोडीन आधारित कफ सिरप की 11,100 बोतलें जब्त कीं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब दो करोड़ रुपये है। कोडीन जो एक दर्द और खांसी से राहत दिलाने वाली दवा है, नशे के रूप में इसके दुरुपयोग के कारण विवादों में है। इसके बढ़ते दुरुपयोग और नशे के खतरे को देखते हुए, केंद्र सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया।
कोडीन आधारित कफ सीरप पर प्रतिबंध
कोडीन आधारित कफ सिरप का नशे के लिए दुरुपयोग बढ़ने के कारण केंद्र सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगाया। यह सिरप आमतौर पर सर्दी-खांसी और हल्के दर्द के इलाज में इस्तेमाल होता है, लेकिन इसके नशे के रूप में दुरुपयोग ने इसे खतरनाक बना दिया है। बच्चों पर इसके हानिकारक प्रभावों के चलते, अमेरिका जैसे देशों में भी इसका उपयोग प्रतिबंधित किया गया है।
क्या है कोडीन
कोडीन एक ओपिओइड दवा है, जो खांसी को नियंत्रित करने और हल्के दर्द को दूर करने में मदद करती है। यह दवा मस्तिष्क के उन हिस्सों पर काम करती है, जो खांसी को नियंत्रित करते हैं। डॉक्टर की सलाह पर इसका उपयोग किया जाता है, लेकिन इसका अति प्रयोग नशे और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
कोडीन कैसे करता है असर
कोडीन शरीर में लिवर के माध्यम से मेटाबोलाइज होकर मॉर्फिन में बदल जाता है, जो दर्द और खांसी को कम करता है। मॉर्फिन नर्वस सिस्टम को धीमा कर देता है, जिससे शरीर को आराम मिलता है। हालांकि बार-बार सेवन से इसका उपयोग आदत बन सकता है और व्यक्ति को इसकी लत लग सकती है। अधिक मात्रा में सेवन से ओवरडोज जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो जीवन के लिए खतरे का कारण बन सकती हैं।
नशे के लिए लोग करते हैं ज्यादा इस्तेमाल
कोडीन का नशा अन्य नशे की चीजों की तुलना में सस्ता और आसानी से उपलब्ध होता है, इसीलिए इसका दुरुपयोग बढ़ रहा है। इसके सेवन से पकड़े जाने का खतरा कम होता है, लेकिन इसके लंबे समय तक इस्तेमाल से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
सेहत के लिए कितना खतरनाक है कोडीन
कोडीन का अत्यधिक या अनुचित सेवन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हो सकता है। इससे न केवल नशा होता है, बल्कि दिमागी कार्यक्षमता भी प्रभावित होती है। गंभीर मामलों में मिर्गी के दौरे तक पड़ सकते हैं। खासकर बच्चों पर इसका प्रभाव अधिक घातक हो सकता है, जिससे मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
यदि कोडीन का सेवन कुछ सप्ताह से अधिक समय तक आवश्यक हो, तो डॉक्टर से परामर्श लेना बेहद जरूरी है। 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यह दवा केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए।
