मेडिकल की दुनिया में आए दिन किसी न किसी बीमारी के इलाज के लिए कई तरह के तकनीकों का ट्रॉयल किया जाता है। ऐसे में अब राजस्थान के जबलपुर शहर के मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों वाले मरीजों में जल्द ही सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी तकनीक का क्लिनिकल जांच शुरू होने वाला है। बता दें कि इस क्लिनिकल ट्रायल यानी जांच को देश का सबसे बड़ा ट्रायल माना जा रहा है।
ट्रॉयल में शामिल होने वाले एक्सपर्ट्स
बता दें कि इस क्लिनिकल जांच में एम्स दिल्ली, पटना, बिलासपुर सहित 15 Leading medical institute के एक्सपर्ट्स शामिल होंगे। इनके अलावा नेपाल और बांग्लादेश के एक्सपर्ट्स भी शामिल होंगे। वहीं भारत में इस मेडिकल कॉलेज को ब्रेस्ट कैंसर रिसर्च का बड़ा सेंटर माना जाता है। दरअसल ऐसा इसलिए क्योंकि यहाँ ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को इलाज काफी कम खर्चे में बढ़िया तरीके से दिया जाता है।
प्रोफेसर नवनीत सक्सेना ने बताया
मेडिकल कॉलेज की रिसर्च यूनिट की एक्सेक्टिव कमिटी के प्रमुख और डीन प्रोफेसर नवनीत सक्सेना ने बताया कि देश के सबसे बड़े क्लिनिकल ट्रॉयल का नेतृत्व मेडिकल कॉलेज ब्रेस्ट कैंसर में किया जाएगा। वहीं टेस्ट के प्रमुख investigator डॉ. संजय कुमार यादव ने बताया कि इस ट्रॉयल में कम लागत वाली डाइ का यूज करके शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों के इलाज के लिए सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी का मूल्यांकन किया जाएगा। इतना ही नहीं ब्रेस्ट कैंसर एसएलएनबी सर्जरी के खर्चे में काफी सस्ती होगी। यानी कि मेडिकल में इसका खर्च 100 रुपए से भी कम होगा। इसके अलावा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर पवन अग्रवाल ने बताया कि इस ट्रॉयल का मेंन मोटिव उन तरीकों की खोज करना है जिसकी मदद से गरीब मरीजों को सस्ते दामों पर इलाज मिल सके।
क्या है सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी तकनीक
सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी एक ऐसी प्रोसेस है जिसमें सेंटिनल लिम्फ नोड के जरिए कैंसर की पहचान की जाती है और उसे हटाया जाता है। वहीं इसका यूज यह निश्चित करने के लिए किया जाता है कि पेशेंट के अंदर कैंसर कोशिकाएं मौजूद हैं या नहीं। हालांकि इसका उपयोग उन लोगों में ज्यादा किया जाता है जिनमें पहले से ही कैंसर का निदान हो चुका है।
