हिंदी सिनेमा के मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल का 90 वर्ष की आयु में 23 दिसंबर 2024 को मुंबई के वॉकहार्ट अस्पताल में निधन हो गया। वह लंबे समय से क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से जूझ रहे थे। उनकी बेटी पिया बेनेगल के अनुसार उनका निधन शाम 6:38 बजे हुआ। श्याम बेनेगल को “अंकुर”, “मंथन”, और “मंडी” जैसी कालजयी फिल्मों के लिए जाना जाता है। इस खबर के बाद यह जरूरी है कि हम इस गंभीर बीमारी, क्रोनिक किडनी डिजीज, के बारे में अधिक जानें, ताकि समय रहते इसका इलाज किया जा सके।
क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) क्या है?
क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) एक ऐसी बीमारी है जिसमें किडनी की कार्यक्षमता धीरे-धीरे घटने लगती है। किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का काम करती है। जब किडनी अपना यह काम ठीक से नहीं कर पाती, तो शरीर में विषाक्त पदार्थ और तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं। यह स्थिति अन्य अंगों पर भी प्रभाव डाल सकती है। इस बीमारी का असर धीरे-धीरे बढ़ता है और अक्सर प्रारंभिक अवस्था में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते।
CKD के मुख्य कारण
क्रोनिक किडनी डिजीज के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
डायबिटीज (मधुमेह)
हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप)
हार्ट डिजीज
जेनेटिक कारण (वंशानुक्रमिक किडनी बीमारियां)
CKD के लक्षण
क्रोनिक किडनी डिजीज के लक्षण शुरुआत में हल्के होते हैं और अक्सर नजरअंदाज किए जाते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, लक्षण अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं:
थकावट और कमजोरी
विशेष रूप से पैरों, टखनों और आंखों के आसपास सूजन होना
पेशाब में बदलाव (बहुत अधिक या कम पेशाब आना)
भूख की कमी
मांसपेशियों में ऐंठन
हाई ब्लड प्रेशर
गहरे रंग का पेशाब
सांस लेने में परेशानी
छाती में दबाव
क्रोनिक किडनी डिजीज की गंभीरता
क्रोनिक किडनी डिजीज अत्यधिक खतरनाक है, क्योंकि यह शरीर को धीरे-धीरे कमजोर करती है। यदि समय पर उपचार न मिले तो यह किडनी फेलियर का कारण बन सकती है। जब किडनी पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है, तो मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि इस बीमारी का स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन समय पर उपचार और सही देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
CKD से बचाव और उपचार
क्रोनिक किडनी डिजीज को नियंत्रित करने के लिए मरीजों को नियमित रूप से ब्लड प्रेशर और शुगर के स्तर की जांच करनी चाहिए। इसके अलावा:
संतुलित आहार का सेवन करें
सिगरेट और शराब से बचें
वजन नियंत्रित रखें
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयां लें
